"बीजेपी-शिव सेना का फ़ेवरिट गाना- खुल्लम खुल्ला करप्शन करें हम दोनों, दुनिया से नहीं डरें हम दोनों."
"जब मोदीजी ने कहा न खाऊँगा, न खाने दूँगा, सत्ता में उनकी सहयोगी शिव सेना ने सुना- तुम मुझे फ़ेवर्स दो, मैं तुम्हें क्लीयरेंस दूँगा."
कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर शिव सेना का दामन थामने वाली प्रियंका चतुर्वेदी ने ये ट्वीट तकरीबन तीन साल पहले 24 अप्रैल 2016 को किया था. तब उन्हें अंदाज़ा भी नहीं होगा कि जिस पार्टी के लिए वो ये पैरोडी ट्विटर पर लिख रही हैं, एक दिन उन्हें उस पार्टी को ही गले लगाना होगा.
कहते हैं राजनीति में कोई दुश्मन स्थाई नहीं होता. सियासी हालात कब-क्या करवट ले लें, इसके बारे में पक्के तौर पर तो छोड़िए, अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है.
प्रियंका ने शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में शिव सेना ज्वाइन की. उन्होंने कहा कि वो मुंबई के लिए काम करना चाहती हैं और यही वजह है कि वह शिव सेना में शामिल हो रही हैं.
उन्होंने ये भी कहा कि उनके पुराने बयानों और ट्वीट को निकाला जाएगा, लेकिन उन्होंने सोच समझकर शिव सेना में शामिल होने का फ़ैसला किया है.
इससे पहले, प्रियंका चतुर्वेदी ने कांग्रेस के प्रवक्ता सहित पार्टी के सभी पदों से त्याग पत्र दे दिया. प्रियंका ने बुधवार को ट्वीट कर कहा था कि कांग्रेस पार्टी में अपना ख़ून-पसीना देने वाले लोगों की जगह बदमाशों को प्राथमिकता देने पर उन्हें गहरा दुख हुआ है.
इसके बाद उन्होंने लिखा था कि वह पार्टी के लिए गाली-पत्थर सबका सामना करती हैं, लेकिन पार्टी के अंदर उन्हें धमकाने वालों को मामूली सज़ा भी न होना दुर्भाग्यपूर्ण है.
प्रियंका चतुर्वेदी ने एक पत्रकार के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए यह बात कही है. दरअसल, उस पत्रकार ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के एक नोटिस को ट्वीट किया था.
इस नोटिस में कहा गया था कि मथुरा में कथित तौर पर प्रियंका चतुर्वेदी के साथ दुर्व्यवहार करने वाले कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की अनुशासनात्मक कार्यवाही को निरस्त किया जाता है.
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी की ओर से जारी किए गए नोटिस में लिखा है कि बीते दिनों मथुरा में कांग्रेस कमिटी की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी की रफ़ाल सौदे पर प्रेस कॉन्फ़्रेस के दौरान मथुरा ज़िलाध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत आठ लोगों ने अमर्यादित व्यवहार किया था. इसके बाद उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी.
नोटिस में लिखा गया है कि इस पर इन लोगों ने माफ़ी मांग ली जिसके बाद कांग्रेस महासचिव और पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया के कहने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई को निरस्त कर दिया गया है.
बीबीसी से बातचीत में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष आर.पी. त्रिपाठी ने कहा कि दुर्व्यवहार करने वाले कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने माफ़ी मांग ली थी जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई को निरस्त कर दिया गया.
उन्होंने कहा कि अगर कोई माफ़ी मांगता है तो उसे माफ़ भी कर दिया जाना चाहिए और इस मसले को ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए.
बीते साल सितंबर में प्रियंका चतुर्वेदी मथुरा गई थीं जहां उन्होंने रफ़ाल सौदे पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. प्रियंका मूलतः मथुरा से ही हैं.
उन्होंने इस दौरान स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत शीर्ष नेतृत्व से की जिसके बाद ज़िलाध्यक्ष अशोक सिंह चकलेश्वर और महासचिव उमेश पंडित समेत आठ लोगों को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया था.
पार्टी ने अब इन कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई को निरस्त कर दिया है इस पर उमेश पंडित का कहना है कि उन्हें कभी अपने ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई के बारे में मालूम ही नहीं था, वह तो तब भी कांग्रेस के लिए काम कर रहे थे और आज भी कर रहे हैं.
उमेश पंडित ने सितंबर में हुई घटना पर बीबीसी से कहा, "जब इस घटना के होने की बात कही जा रही है उस समय मैं अपने पिता के पास अस्पताल में था लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसा कुछ हुआ भी नहीं था. अगर ऐसे हुआ था तो उन्होंने पुलिस को शिकायत क्यों नहीं की. यह सब पूर्व विधायक प्रदीप माथुर के साथ उनकी बातचीत के बाद हुआ था क्योंकि वह हमसे बात ही नहीं करती थीं."
प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने ट्वीट में कहा है कि ख़ून-पसीना देने वाले उन जैसे कार्यकर्ताओं की जगह बदमाशों को तरजीह दी जा रही है, इस पर उमेश पंडित कहते हैं, "हमें गुंडा कैसे कह सकती हैं वो. हम वो लोग हैं जिनके घर में आज़ाद हिंद फ़ौज की स्थापना हुई थी. हम 27 साल से कांग्रेस में हैं और कांग्रेस में रहेंगे. ज़िलाध्यक्ष अशोक चकलेश्वर तीन बार के सांसद रहे चकलेश्वर सिंह के पुत्र हैं. उन्होंने मथुरा में रिफ़ाइनरी लगवाई और इंदिरा गांधी जब भी मथुरा आती थीं उनके यहां रुकती थीं. तो वह कैसे हमें बदमाश कह सकती हैं."
कांग्रेस कवर करने वाले पत्रकारों का कहना है कि प्रियंका चतुर्वेदी मथुरा से आती हैं लेकिन उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि महाराष्ट्र से जुड़ी हुई है और वह मुंबई उत्तर-पश्चिम से लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखती थीं. हालांकि कांग्रेस ने वहां से इस बार संजय निरुपम को उम्मीदवार बनाया है.
मुंबई उत्तर-पश्चिम से पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष गुरुदास कामत सांसद रहे हैं और प्रियंका चतुर्वेदी पहले कामत की टीम में भी काम कर चुकी हैं.
पत्रकारों का यह भी मानना है कि मुंबई उत्तर-पश्चिम से सीट फ़ाइनल होने के बाद प्रियंका मथुरा से चुनाव लड़ने की इच्छा रखती थीं लेकिन वहां से कांग्रेस ने महेश पाठक को उम्मीदवार बना दिया.
विश्लेषकों का कहना है कि प्रियंका इन सबसे अधिक तब ख़फ़ा हुईं जब उनसे कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने वाले कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई को वापस ले लिया.
उमेश पंडित कहते हैं कि प्रियंका मथुरा से चुनाव लड़ना चाहती थीं इसी कारण वह ग़ुस्से में हैं और ऐसे समय में जब 18 अप्रैल को मथुरा में वोटिंग है तब उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था.
Friday, April 19, 2019
Monday, April 15, 2019
आईपीएल-12: जडेजा के तीन चौकों ने कैसे मैच का पासा पलटा
रविवार को आईपीएल-12 में दो मुक़ाबले खेले गए जहां पहले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स ने कोलकाता नाइट राइडर्स को पांच विकेट से हराया.
वहीं, दूसरे मैच में दिल्ली कैपिटल्स ने सनराइज़र्स हैदराबाद को उसी के घर में 39 रन से बड़ी हार का स्वाद चखाया.
सबसे पहले बात दूसरे मैच की.
इस मुक़ाबले में सनराइज़र्स हैदराबाद के सामने जीत के लिए 156 रनों का लक्ष्य था लेकिन दिल्ली के गेंदबाज़ों के सामने उसकी पूरी टीम 18.5 ओवर में ही महज़ 116 रन पर ढेर हो गई.
मैच में हैदराबाद के बल्लेबाज़ों का यह हाल था कि सलामी जोड़ी डेविड वार्नर और जॉनी बेयरस्टो ही कुछ जमकर खेल सके. इन दोनों ने पहले विकेट के लिए 72 रन भी जोडे़. वार्नर ने 51 और बेयरस्टो ने 41 रन बनाए.
इनके अलावा बाकी कोई भी बल्लेबाज़ दिल्ली के तेज़ गेंदबाज़ कैगिसो रबाडा, कीमो पॉल और क्रिस मोरिस की तिकड़ी का सामना नहीं कर सका. यहां तक कि हैदराबाद के बाकी बल्लेबाज़ दहाई के अंक तक भी नहीं पहुंचे.
कैगिसो रबाडा ने 22 रन देकर चार, क्रिस मोरिस ने 22 रन देकर तीन और कीमो पॉल ने 17 रन देकर तीन विकेट झटके.
इससे पहले दिल्ली कैपिटल्स ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी के लिए बुलाए जाने के बाद निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट खोकर 155 रन बनाए.
दिल्ली के कप्तान श्रेयस अय्यर ने 45 और कोलिन मुनरो ने 40 रन बनाए.
एक तरह से इस मैच में दिल्ली के तेज़ गेंदाबाज़ों के सामने हैदराबाद की बल्लेबाज़ी ताश के पत्तों की तरह ढह गई.
इस जीत के साथ ही दिल्ली कैपिटल्स आठ मैचों में पांच जीत और तीन हार और 10 अंको के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर आ गई है.
ऐसा लगता है कि दिल्ली ने अपना नाम बदलकर अपनी क़िस्मत भी बदल दी है. इससे पहले दिल्ली कैपिटल्स दिल्ली डेयरडेविल्स के नाम से खेलती थी.
दूसरी तरफ़ सनराईज़र्स हैरदराबाद के अब सात मैच में तीन जीत और चार हार के बाद छह अंक हैं और वह छठे स्थान पर पहुंच गई है.
इससे पहले खेले गए पहले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स ने अपनी जीत की लय बरक़रार रखते हुए ईडन गार्डंस में मेज़बान कोलकाता नाइट राइडर्स को पांच विकेट से मात दी.
चेन्नई के सामने जीत के लिए 162 रनों का लक्ष्य था जो उसने सुरेश रैना के नाबाद 58 और रविंद्र जडेजा के नाबाद 31 रन की मदद से दो गेंद पहले 19.4 ओवर में पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया.
इससे पहले टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए कोलकाता ने सलमी बल्लेबाज़ क्रिस लिन के 82 और नीतीश राणा के 21 रनों की मदद से निर्धारित 20 ओवर में आठ विकेट खोकर 161 रन बनाए.
इस मैच के हीरो वैसे तो सुरेश रैना रहे जो लम्बे समय बाद अपनी लय में लौटे लेकिन मैच में रोमांच रविंद्र जडेजा ने भी पैदा किया. उन्होंने पारी के 19वें ओवर में हैरी गर्नी की गेंदों पर लगातार तीन चौके लगाकर चेन्नई की नाव जीत के पार लगा दी.
इस ओवर में बने 16 रन कोलकाता की हार की मुख्य वजह भी साबित हुए.
आख़िरी ओवर में तो चेन्नई को जीत के लिए केवल आठ रनों की ज़रूरत थी जो पियूष चावला की गेंदों पर आसानी से बन गए.
इस मुक़ाबले में सुरेश रैना भी 42 गेंदों पर सात चौके और एक छक्के के सहारे बनाए गए नाबाद 58 रनों की बदौलत सुर्ख़ियों में छा गए. यह इस आईपीएल में सुरेश रैना का पहला अर्धशतक है.
इससे पहले वह दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़ 30 और राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ़ 36 रन बनाने में ज़रूर कामयाब रहे थे लेकिन इसके बाद लगातार चार मैच में उनका बल्ला कुछ ख़ास नही चमका.
वैसे सुरेश रैना आईपीएल के सबसे कामयाब बल्लेबाज़ो में से एक रहे हैं. वह आईपीएल में 5000 से अधिक रन बना चुके हैं.
सुरेश रैना दो साल पहले तब चर्चा में आए थे जब वह और युवराज सिंह श्रीलंका के ख़िलाफ़ एकदिवसीय सीरीज़ से पहले यो-यो टेस्ट की वजह से भारतीय टीम से बाहर कर दिए गए थे.
कभी भारतीय टीम के सर्वश्रेष्ठ फ़िल्डर माने जाने वाले सुरेश रैना ने भारत के लिए अपना पिछला एकदिवसीय मैच पिछले साल जुलाई में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेला था जिसमें वह केवल एक रन ही बना सके थे.
रविवार के चेन्नई की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले गेंदबाज़ इमरान ताहिर को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.
उन्होंने चार ओवर में केवल 27 रन देकर चार विकेट हासिल किए.
उनका शिकार बने कोलकाता के लिए सर्वाधिक 82 रन बनाने वाले क्रिस लिन, नीतीश राणा, रॉबिन उथप्पा और अपने बल्ले से इस बार बेहद ख़तरनाक साबित हो रहे आंद्रे रसेल.
अगर यह माना जाए कि इमरान ताहिर ने चेन्नई की जीत की रहा आसान की तो ग़लत नहीं होगा. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी उन पर बेहद भरोसा है.
इस जीत की बदौलत पिछली चैंपियन चेन्नई तेज़ी से अंक तालिका में टॉप पर तो बनी हुई है साथ ही अब उसके खाते में आठ मैचों में सात जीत और एक हार के साथ 14 अंक हैं.
वहीं, दूसरे मैच में दिल्ली कैपिटल्स ने सनराइज़र्स हैदराबाद को उसी के घर में 39 रन से बड़ी हार का स्वाद चखाया.
सबसे पहले बात दूसरे मैच की.
इस मुक़ाबले में सनराइज़र्स हैदराबाद के सामने जीत के लिए 156 रनों का लक्ष्य था लेकिन दिल्ली के गेंदबाज़ों के सामने उसकी पूरी टीम 18.5 ओवर में ही महज़ 116 रन पर ढेर हो गई.
मैच में हैदराबाद के बल्लेबाज़ों का यह हाल था कि सलामी जोड़ी डेविड वार्नर और जॉनी बेयरस्टो ही कुछ जमकर खेल सके. इन दोनों ने पहले विकेट के लिए 72 रन भी जोडे़. वार्नर ने 51 और बेयरस्टो ने 41 रन बनाए.
इनके अलावा बाकी कोई भी बल्लेबाज़ दिल्ली के तेज़ गेंदबाज़ कैगिसो रबाडा, कीमो पॉल और क्रिस मोरिस की तिकड़ी का सामना नहीं कर सका. यहां तक कि हैदराबाद के बाकी बल्लेबाज़ दहाई के अंक तक भी नहीं पहुंचे.
कैगिसो रबाडा ने 22 रन देकर चार, क्रिस मोरिस ने 22 रन देकर तीन और कीमो पॉल ने 17 रन देकर तीन विकेट झटके.
इससे पहले दिल्ली कैपिटल्स ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी के लिए बुलाए जाने के बाद निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट खोकर 155 रन बनाए.
दिल्ली के कप्तान श्रेयस अय्यर ने 45 और कोलिन मुनरो ने 40 रन बनाए.
एक तरह से इस मैच में दिल्ली के तेज़ गेंदाबाज़ों के सामने हैदराबाद की बल्लेबाज़ी ताश के पत्तों की तरह ढह गई.
इस जीत के साथ ही दिल्ली कैपिटल्स आठ मैचों में पांच जीत और तीन हार और 10 अंको के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर आ गई है.
ऐसा लगता है कि दिल्ली ने अपना नाम बदलकर अपनी क़िस्मत भी बदल दी है. इससे पहले दिल्ली कैपिटल्स दिल्ली डेयरडेविल्स के नाम से खेलती थी.
दूसरी तरफ़ सनराईज़र्स हैरदराबाद के अब सात मैच में तीन जीत और चार हार के बाद छह अंक हैं और वह छठे स्थान पर पहुंच गई है.
इससे पहले खेले गए पहले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स ने अपनी जीत की लय बरक़रार रखते हुए ईडन गार्डंस में मेज़बान कोलकाता नाइट राइडर्स को पांच विकेट से मात दी.
चेन्नई के सामने जीत के लिए 162 रनों का लक्ष्य था जो उसने सुरेश रैना के नाबाद 58 और रविंद्र जडेजा के नाबाद 31 रन की मदद से दो गेंद पहले 19.4 ओवर में पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया.
इससे पहले टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए कोलकाता ने सलमी बल्लेबाज़ क्रिस लिन के 82 और नीतीश राणा के 21 रनों की मदद से निर्धारित 20 ओवर में आठ विकेट खोकर 161 रन बनाए.
इस मैच के हीरो वैसे तो सुरेश रैना रहे जो लम्बे समय बाद अपनी लय में लौटे लेकिन मैच में रोमांच रविंद्र जडेजा ने भी पैदा किया. उन्होंने पारी के 19वें ओवर में हैरी गर्नी की गेंदों पर लगातार तीन चौके लगाकर चेन्नई की नाव जीत के पार लगा दी.
इस ओवर में बने 16 रन कोलकाता की हार की मुख्य वजह भी साबित हुए.
आख़िरी ओवर में तो चेन्नई को जीत के लिए केवल आठ रनों की ज़रूरत थी जो पियूष चावला की गेंदों पर आसानी से बन गए.
इस मुक़ाबले में सुरेश रैना भी 42 गेंदों पर सात चौके और एक छक्के के सहारे बनाए गए नाबाद 58 रनों की बदौलत सुर्ख़ियों में छा गए. यह इस आईपीएल में सुरेश रैना का पहला अर्धशतक है.
इससे पहले वह दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़ 30 और राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ़ 36 रन बनाने में ज़रूर कामयाब रहे थे लेकिन इसके बाद लगातार चार मैच में उनका बल्ला कुछ ख़ास नही चमका.
वैसे सुरेश रैना आईपीएल के सबसे कामयाब बल्लेबाज़ो में से एक रहे हैं. वह आईपीएल में 5000 से अधिक रन बना चुके हैं.
सुरेश रैना दो साल पहले तब चर्चा में आए थे जब वह और युवराज सिंह श्रीलंका के ख़िलाफ़ एकदिवसीय सीरीज़ से पहले यो-यो टेस्ट की वजह से भारतीय टीम से बाहर कर दिए गए थे.
कभी भारतीय टीम के सर्वश्रेष्ठ फ़िल्डर माने जाने वाले सुरेश रैना ने भारत के लिए अपना पिछला एकदिवसीय मैच पिछले साल जुलाई में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेला था जिसमें वह केवल एक रन ही बना सके थे.
रविवार के चेन्नई की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले गेंदबाज़ इमरान ताहिर को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.
उन्होंने चार ओवर में केवल 27 रन देकर चार विकेट हासिल किए.
उनका शिकार बने कोलकाता के लिए सर्वाधिक 82 रन बनाने वाले क्रिस लिन, नीतीश राणा, रॉबिन उथप्पा और अपने बल्ले से इस बार बेहद ख़तरनाक साबित हो रहे आंद्रे रसेल.
अगर यह माना जाए कि इमरान ताहिर ने चेन्नई की जीत की रहा आसान की तो ग़लत नहीं होगा. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी उन पर बेहद भरोसा है.
इस जीत की बदौलत पिछली चैंपियन चेन्नई तेज़ी से अंक तालिका में टॉप पर तो बनी हुई है साथ ही अब उसके खाते में आठ मैचों में सात जीत और एक हार के साथ 14 अंक हैं.
Monday, April 8, 2019
संविधान के दायरे में राम मंदिर निर्माण की संभावनाओं को तलाशा जाएगा
लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया.
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह घोषणा पत्र तीन चीज़ों पर आधारित है. उन्होंने कहा कि "राष्ट्रवाद हमारी प्रेरणा है, अन्त्योदय हमारा दर्शन है और सुशासन हमारा मंत्र है."
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अलग से जल शक्ति मंत्रालय बनाएगी, जो मछुआरों के सशक्तीकरण के लिए काम करेगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आज देश के कई प्रदेशों में पानी की समस्या के समाधान को गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है. इसलिए हम एक अलग 'जल शक्ति मंत्रालय' बनाएंगे."
अपने गिनाए वादों में उन्होंने हर घर तक नल से जल पहुंचाने की बात कही.
वहीं कांग्रेस ने भाजपा के घोषणा पत्र को "झांसा पत्र" करार दिया. कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घोषणा पत्र की जगह माफ़ीनामा पत्र जारी करना चाहिए था.
भाजपा ने अपने घोषणा पत्र को 'संकल्प पत्र' का नाम दिया है. अमित शाह की अध्यक्षता में जारी किए गए घोषणा पत्र में भाजपा ने वादा किया है कि राष्ट्रवाद उनकी सरकार की प्राथमिकता होगी.
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.
वहीं उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर भी बात की और कहा कि संविधान के दायरे में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संभावनाओं की तलाश की जाएगी और सही प्रयास किए जाएंगे.
घोषणा पत्र में यह भी कहा गया है कि अगर अगली सरकार बनती है तो सबरीमला जैसे मामलों में "आस्था और विश्वास के विषयों को संवैधानिक संरक्षण" दिया जाएगा.
"आतंकवाद" और "उग्रवाद" के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस और "आतंकवाद" का मुकाबला करने के लिए सुरक्षाबलों को सशक्त किया जाएगा.
सुरक्षा बलों को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा.
पूर्वोत्तर राज्यों में अवैध घुसपैठ रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे.
धारा 370
जम्मू-कश्मीर में शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे.
भाजपा का मानना है कि धारा 35A जम्मू-कश्मीर के गैर-स्थायी निवासियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभावपूर्ण है. यह राज्य के विकास में बाधा है.
कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास किया जाएगा.
धारा 370 पर भाजपा सरकार का पुराना रुख़ बरकरार रहेगा.
राम मंदिर
संविधान के दायरे में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संभावनाओं को तलाश किया जाएगा और इसके लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे.
सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सबरीमला की आस्था, परंपरा और पूजा पद्धति का पूरा विषय रखा जाएगा. यह प्रयास होगा कि आस्था और विश्वास के विषयों को संवैधानिक संरक्षण मिले.
कृषि
देश के सभी किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की जाएगी.
छोटे और खेतिहर किसानों की सामाजिक सुरक्षा के लिए 60 साल की उम्र के बाद पेंशन दिया जाएगा.
कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए 25 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा.
आधारभूत संरचना/व्यापार
2022 तक रेल पटरियों का ब्रॉड गेज में परिवर्तन किया जाएगा और उनका विद्युतीकरण किया जाएगा.
भारत साल 2025 तक 5 लाख करोड़ डॉलर और साल 2032 तक 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगी.
आधारभूत संरचना को विकसित करने के लिए 100 लाख करोड़ का पूंजीगत निवेश किया जाएगा.
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए एक लाख करोड़ रुपए की क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की जाएगी.
राष्ट्रीय व्यापार आयोग की स्थापना की जाएगी.
175 गीगा वॉट नवीनकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करेंगे.
महिलाएं
सरकारी क्षेत्र में महिलाकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाएगी.
संविधान में प्रावधान करके महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा.
तीन तलाक़ को खत्म कर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाया जाएगा.
स्वास्थ्य
आयुष्मान भारत के तहत 1.50 लाख स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र खोले जाएंगे.
देशभर में 75 मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे.
प्रशिक्षित डॉक्टरों और जनसंख्या का अनुपात 1:1400 करने का प्रयास किया जाएगा.
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह घोषणा पत्र तीन चीज़ों पर आधारित है. उन्होंने कहा कि "राष्ट्रवाद हमारी प्रेरणा है, अन्त्योदय हमारा दर्शन है और सुशासन हमारा मंत्र है."
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अलग से जल शक्ति मंत्रालय बनाएगी, जो मछुआरों के सशक्तीकरण के लिए काम करेगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आज देश के कई प्रदेशों में पानी की समस्या के समाधान को गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है. इसलिए हम एक अलग 'जल शक्ति मंत्रालय' बनाएंगे."
अपने गिनाए वादों में उन्होंने हर घर तक नल से जल पहुंचाने की बात कही.
वहीं कांग्रेस ने भाजपा के घोषणा पत्र को "झांसा पत्र" करार दिया. कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घोषणा पत्र की जगह माफ़ीनामा पत्र जारी करना चाहिए था.
भाजपा ने अपने घोषणा पत्र को 'संकल्प पत्र' का नाम दिया है. अमित शाह की अध्यक्षता में जारी किए गए घोषणा पत्र में भाजपा ने वादा किया है कि राष्ट्रवाद उनकी सरकार की प्राथमिकता होगी.
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.
वहीं उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर भी बात की और कहा कि संविधान के दायरे में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संभावनाओं की तलाश की जाएगी और सही प्रयास किए जाएंगे.
घोषणा पत्र में यह भी कहा गया है कि अगर अगली सरकार बनती है तो सबरीमला जैसे मामलों में "आस्था और विश्वास के विषयों को संवैधानिक संरक्षण" दिया जाएगा.
"आतंकवाद" और "उग्रवाद" के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस और "आतंकवाद" का मुकाबला करने के लिए सुरक्षाबलों को सशक्त किया जाएगा.
सुरक्षा बलों को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा.
पूर्वोत्तर राज्यों में अवैध घुसपैठ रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे.
धारा 370
जम्मू-कश्मीर में शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे.
भाजपा का मानना है कि धारा 35A जम्मू-कश्मीर के गैर-स्थायी निवासियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभावपूर्ण है. यह राज्य के विकास में बाधा है.
कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास किया जाएगा.
धारा 370 पर भाजपा सरकार का पुराना रुख़ बरकरार रहेगा.
राम मंदिर
संविधान के दायरे में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संभावनाओं को तलाश किया जाएगा और इसके लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे.
सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सबरीमला की आस्था, परंपरा और पूजा पद्धति का पूरा विषय रखा जाएगा. यह प्रयास होगा कि आस्था और विश्वास के विषयों को संवैधानिक संरक्षण मिले.
कृषि
देश के सभी किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की जाएगी.
छोटे और खेतिहर किसानों की सामाजिक सुरक्षा के लिए 60 साल की उम्र के बाद पेंशन दिया जाएगा.
कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए 25 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा.
आधारभूत संरचना/व्यापार
2022 तक रेल पटरियों का ब्रॉड गेज में परिवर्तन किया जाएगा और उनका विद्युतीकरण किया जाएगा.
भारत साल 2025 तक 5 लाख करोड़ डॉलर और साल 2032 तक 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगी.
आधारभूत संरचना को विकसित करने के लिए 100 लाख करोड़ का पूंजीगत निवेश किया जाएगा.
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए एक लाख करोड़ रुपए की क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की जाएगी.
राष्ट्रीय व्यापार आयोग की स्थापना की जाएगी.
175 गीगा वॉट नवीनकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करेंगे.
महिलाएं
सरकारी क्षेत्र में महिलाकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाएगी.
संविधान में प्रावधान करके महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा.
तीन तलाक़ को खत्म कर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाया जाएगा.
स्वास्थ्य
आयुष्मान भारत के तहत 1.50 लाख स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र खोले जाएंगे.
देशभर में 75 मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे.
प्रशिक्षित डॉक्टरों और जनसंख्या का अनुपात 1:1400 करने का प्रयास किया जाएगा.
Friday, April 5, 2019
43% ने कहा- पीएम पद पर मोदी पहली पसंद, लेकिन 41% मानते हैं उन्होंने राफेल में गड़बड़ी की
नई दिल्ली. देश में भले ही कुछ महीनों से अयोध्या, रफेल और गोरक्षा जैसे मुद्दे चर्चा में रहे हों, लेकिन वोटर इस समय विकास को सबसे अहम चुनावी मुद्दा मान रहा है। यह बात सीएसडीएस-लोकनीति-तिरंगा टीवी-द हिंंदू और दैनिक भास्कर के प्री-पोल सर्वे में सामने आई है। सर्वे में हिस्सा लेने वाले 43% लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी ही पहली पसंद हैं। हालांकि, 41% लोग मानते हैं मोदी ने राफेल में गड़बड़ी की पर मिनिमम इनकम गारंटी के चुनावी वादे के बावजूद 28% लोग ही चाहते हैं कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनें। सिर्फ 3% लोगों के लिए राफेल-मंदिर बड़े मुद्दे हैं। 33% विकास और 25% लोग महंगाई के मुद्दे पर वोट डालेंगे।
सर्वे कैसे हुआ
सर्वे 19 राज्यों में 24 से 31 मार्च के बीच किया गया। इसमें 101 लोकसभा क्षेत्रों की 101 विधानसभा सीटों के 10,010 लोगों ने भाग लिया। सर्वे में कुल 46% महिलाएं, 19% अनुसूचित जाति, 10% अनुसूचित जनजाति, 13% मुस्लिम, 2% ईसाई और 3% सिख मतदाता शामिल थे। यह सर्वे चार भागों में है। आज पढ़िए इसकी पहली कड़ी...
बालाकोट, सवर्ण आरक्षण, किसान सम्मान सबसे असरदार
सर्वे में कई चौंकाने वाले फैक्टर सामने आए हैं। जैसे- मई 2018 में जहां सिर्फ 34% लोग चाहते थे कि मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनें। वहीं 24 से 31 मार्च के बीच किए गए इस प्री पोल सर्वे में 43 फीसदी लोगों ने मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री पद पर देखने की इच्छा जताई। यहां बालाकोट एयर स्ट्राइक, सवर्ण आरक्षण और किसान सम्मान जैसी योजनाओं का असर देखने को मिला।
किसान सम्मान योजना, एयर स्ट्राइक और सवर्ण आरक्षण ने मोदी की लोकप्रियता 9% तक बढ़ाई
इनकंबेंसी की मुखरता में फंसी मोदी सरकार के हालिया तीन फैसले उसे दोबारा सत्ता में दिलाने में मददगार हो सकते हैं। सीएसडीएस-लोकनीति के मार्च के आखिरी हफ्ते में किए गए सर्वे में यह निष्कर्ष सामने आया है। मोदी सरकार ने यह फैसले 7 जनवरी से 26 फरवरी के बीच लिए थे, इससे स्थिति कुछ बदल सकती है। हालांकि इसके बावजूद सत्ता में वापसी बेहद करीबी मामला होने जा रहा है।
मई 2018 : 34% लोग मोदी की वापसी चाहते थे, प्री पोल सर्वे : 43% चाहते हैं मोदी फिर पीएम बनें
7 जनवरी को मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया था। 1 फरवरी को गरीब किसानों के खाते में सीधे धन ट्रांसफर करने की किसान सम्मान निधि की घोषणा की थी। जबकि फरवरी के आखिरी हफ्ते में पुलवामा हमले के बदले के तौर पर पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक की थी। सर्वे के मुताबिक 43 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी की सत्ता में फिर से वापसी चाहते हैं। यह 2014 के चुनाव से सात फीसदी अधिक और मई 2018 के सर्वे की तुलना में नौ फीसदी अधिक है। मई 2018 में 34 फीसदी ने सरकार की वापसी चाही थी। शायद यह कहना गलत नहीं होगा कि यह इजाफा ऊपर बताए तीन फैसलों की वजह से है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2018 में तीन राज्यों में भाजपा की हार के बावजूद यह बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सर्वे में लोगों से पूछा गया कि वे किन मुद्दों पर वोट देंगे तो सिर्फ चार फीसदी ने एयरस्ट्राइक और तीन फीसदी ने ही सवर्ण आरक्षण को मुद्दा बताया। 33 फीसदी ने विकास, 25 फीसदी ने महंगाई और 20 फीसदी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर वोट डालने की बात कही है।
बालाकोट एयर स्ट्राइक से मोदी को फायदा
पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी कैंप तबाह करने का फैसला नरेन्द्र मोदी को इस चुनाव में फायदा पहुंचाने वाला हो सकता है। इस एयर स्ट्राइक के बारे में न जानने वाले वोटर्स की तुलना में जानने वाले वोटर्स में मोदी सरकार को एक और मौका देने का प्रतिशत ज्यादा है।
सर्वे कैसे हुआ
सर्वे 19 राज्यों में 24 से 31 मार्च के बीच किया गया। इसमें 101 लोकसभा क्षेत्रों की 101 विधानसभा सीटों के 10,010 लोगों ने भाग लिया। सर्वे में कुल 46% महिलाएं, 19% अनुसूचित जाति, 10% अनुसूचित जनजाति, 13% मुस्लिम, 2% ईसाई और 3% सिख मतदाता शामिल थे। यह सर्वे चार भागों में है। आज पढ़िए इसकी पहली कड़ी...
बालाकोट, सवर्ण आरक्षण, किसान सम्मान सबसे असरदार
सर्वे में कई चौंकाने वाले फैक्टर सामने आए हैं। जैसे- मई 2018 में जहां सिर्फ 34% लोग चाहते थे कि मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनें। वहीं 24 से 31 मार्च के बीच किए गए इस प्री पोल सर्वे में 43 फीसदी लोगों ने मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री पद पर देखने की इच्छा जताई। यहां बालाकोट एयर स्ट्राइक, सवर्ण आरक्षण और किसान सम्मान जैसी योजनाओं का असर देखने को मिला।
किसान सम्मान योजना, एयर स्ट्राइक और सवर्ण आरक्षण ने मोदी की लोकप्रियता 9% तक बढ़ाई
इनकंबेंसी की मुखरता में फंसी मोदी सरकार के हालिया तीन फैसले उसे दोबारा सत्ता में दिलाने में मददगार हो सकते हैं। सीएसडीएस-लोकनीति के मार्च के आखिरी हफ्ते में किए गए सर्वे में यह निष्कर्ष सामने आया है। मोदी सरकार ने यह फैसले 7 जनवरी से 26 फरवरी के बीच लिए थे, इससे स्थिति कुछ बदल सकती है। हालांकि इसके बावजूद सत्ता में वापसी बेहद करीबी मामला होने जा रहा है।
मई 2018 : 34% लोग मोदी की वापसी चाहते थे, प्री पोल सर्वे : 43% चाहते हैं मोदी फिर पीएम बनें
7 जनवरी को मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया था। 1 फरवरी को गरीब किसानों के खाते में सीधे धन ट्रांसफर करने की किसान सम्मान निधि की घोषणा की थी। जबकि फरवरी के आखिरी हफ्ते में पुलवामा हमले के बदले के तौर पर पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक की थी। सर्वे के मुताबिक 43 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी की सत्ता में फिर से वापसी चाहते हैं। यह 2014 के चुनाव से सात फीसदी अधिक और मई 2018 के सर्वे की तुलना में नौ फीसदी अधिक है। मई 2018 में 34 फीसदी ने सरकार की वापसी चाही थी। शायद यह कहना गलत नहीं होगा कि यह इजाफा ऊपर बताए तीन फैसलों की वजह से है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2018 में तीन राज्यों में भाजपा की हार के बावजूद यह बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सर्वे में लोगों से पूछा गया कि वे किन मुद्दों पर वोट देंगे तो सिर्फ चार फीसदी ने एयरस्ट्राइक और तीन फीसदी ने ही सवर्ण आरक्षण को मुद्दा बताया। 33 फीसदी ने विकास, 25 फीसदी ने महंगाई और 20 फीसदी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर वोट डालने की बात कही है।
बालाकोट एयर स्ट्राइक से मोदी को फायदा
पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी कैंप तबाह करने का फैसला नरेन्द्र मोदी को इस चुनाव में फायदा पहुंचाने वाला हो सकता है। इस एयर स्ट्राइक के बारे में न जानने वाले वोटर्स की तुलना में जानने वाले वोटर्स में मोदी सरकार को एक और मौका देने का प्रतिशत ज्यादा है।
Monday, March 25, 2019
Moto G7 और Motorola One भारत में लॉन्च, जानें कीमत और फीचर्स
चीनी स्मार्टफोन मेकर मोटोरोला ने भारत में Moto G7 लॉन्च कर दिया है. इसक साथ ही कंपनी ने Motorola One भी लॉन्च किया है. Moto G7 की कीमत 16,999 रुपये है. इस कीमत पर 4GB रैम के साथ 64GB की इंटर्नल मेमोरी दी जाएगी. Motorola One के 4GB रैम वेरिएंट की कीमत 13,999 रुपये है.
Moto G7 की बिक्री 25 मार्च से रिटेल स्टोर्स और फ्लिपकार्ट पर होगी और यहां यह दो कलर वेरिएंट्स सेरेमिक ब्लैक और क्लियर वॉइट में मिलेगा.
लॉन्च ऑफर के तहत दोनों स्मार्टफोन्स की खरीदारी पर रिलायंस जियो की तरफ से कैशबैक मिलेगा. 198 और 299 रुपये के प्लान के साथ 2200 रुपये का कैशबैक मिलेगा. हालांकि यह कई रिचार्ज कूपन के तौर पर मिलेगा जिससे आप सिर्फ जियो रिचार्ज ही करा सकेंगे.
Moto G7
Moto G7 में 6.2 इंच की मैक्स विज फुल एचडी प्लस डिस्प्ले दी गई है. इस स्मार्टफोन में Qualcomm Snapdragon 632 प्रॉसेसर है और इसमें Android Pie दिया गया है. कंपनी के मुताबकि इसकी बैटरी फास्ट चार्ज होती है और इसके साथ 15W का टर्बो पावर चार्जर भी दिया जाएगा.
फोटॉग्रफी के लिए इस स्मार्टफोन में 12 मेगापिक्सल का डुअल कैमरा दिया गया है. इसमें पोर्ट्रेड मोड, स्पॉट कलर और ऑटो स्माइल कैप्चर जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इस स्मार्टफोन में 4GB रैम के साथ 64GB की इंटर्नल मेमोरी दी गई है जिसे माइक्रो एसडी कार्ड के जरिए बढ़ाया जा सकता है. इस स्मार्टफोन की बैटरी 3,000mAh की है और कनेक्टिविटी के लिए इसमें यूएसबी टाइप सी दिया गया है.
Motorola One
इस स्मार्टफोन में 5.9 इंच की मैक्स विजन डिस्प्ले दी गई है. कंपनी के मुताबिक इस फोन को सिर्फ 20 मिनट चार्ज करके 6 घंटे तक चलाया जा सकता है. यह स्मार्टफोन Qualcomm Snapdragon 625 ऑक्टाकोर प्रॉसेसर पर चलता है. इस स्मार्टफोन में 4GB रैम के साथ 64GB की इंटर्नल स्टोरेज दी गई है जिसे माइक्रो एसडी कार्ड के जरिए बढ़ाया जा सकता है.
फोटॉग्रफी के लिए इस स्मार्टफोन में 13 मेगापिक्सल का डुअल रियर कैमरा दिया गया है. सेल्फी के लिए इसमें 8 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है. कंपनी ने इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड फीचर्स भी दिए हैं. गूगल लेंस भी इन्बिल्ट है और पोर्ट्रेट मोड का भी ऑप्शन दिया गया है जो दूसरे डुअल कैमरा सेटअप स्मार्टफोन्स में दिए जाते हैं.
स्मार्टफोन की बॉडी कर्व्ड ग्लास है और रियर से भी कर्व्ड है ताकि इसे होल्ड करने में आसानी हो. कनेक्टिविटी के लिए इन दोनों स्मार्टफोन्स में स्टैंडर्ड फीचर्स दिए गए हैं.
Moto G7 की बिक्री 25 मार्च से रिटेल स्टोर्स और फ्लिपकार्ट पर होगी और यहां यह दो कलर वेरिएंट्स सेरेमिक ब्लैक और क्लियर वॉइट में मिलेगा.
लॉन्च ऑफर के तहत दोनों स्मार्टफोन्स की खरीदारी पर रिलायंस जियो की तरफ से कैशबैक मिलेगा. 198 और 299 रुपये के प्लान के साथ 2200 रुपये का कैशबैक मिलेगा. हालांकि यह कई रिचार्ज कूपन के तौर पर मिलेगा जिससे आप सिर्फ जियो रिचार्ज ही करा सकेंगे.
Moto G7
Moto G7 में 6.2 इंच की मैक्स विज फुल एचडी प्लस डिस्प्ले दी गई है. इस स्मार्टफोन में Qualcomm Snapdragon 632 प्रॉसेसर है और इसमें Android Pie दिया गया है. कंपनी के मुताबकि इसकी बैटरी फास्ट चार्ज होती है और इसके साथ 15W का टर्बो पावर चार्जर भी दिया जाएगा.
फोटॉग्रफी के लिए इस स्मार्टफोन में 12 मेगापिक्सल का डुअल कैमरा दिया गया है. इसमें पोर्ट्रेड मोड, स्पॉट कलर और ऑटो स्माइल कैप्चर जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इस स्मार्टफोन में 4GB रैम के साथ 64GB की इंटर्नल मेमोरी दी गई है जिसे माइक्रो एसडी कार्ड के जरिए बढ़ाया जा सकता है. इस स्मार्टफोन की बैटरी 3,000mAh की है और कनेक्टिविटी के लिए इसमें यूएसबी टाइप सी दिया गया है.
Motorola One
इस स्मार्टफोन में 5.9 इंच की मैक्स विजन डिस्प्ले दी गई है. कंपनी के मुताबिक इस फोन को सिर्फ 20 मिनट चार्ज करके 6 घंटे तक चलाया जा सकता है. यह स्मार्टफोन Qualcomm Snapdragon 625 ऑक्टाकोर प्रॉसेसर पर चलता है. इस स्मार्टफोन में 4GB रैम के साथ 64GB की इंटर्नल स्टोरेज दी गई है जिसे माइक्रो एसडी कार्ड के जरिए बढ़ाया जा सकता है.
फोटॉग्रफी के लिए इस स्मार्टफोन में 13 मेगापिक्सल का डुअल रियर कैमरा दिया गया है. सेल्फी के लिए इसमें 8 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है. कंपनी ने इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड फीचर्स भी दिए हैं. गूगल लेंस भी इन्बिल्ट है और पोर्ट्रेट मोड का भी ऑप्शन दिया गया है जो दूसरे डुअल कैमरा सेटअप स्मार्टफोन्स में दिए जाते हैं.
स्मार्टफोन की बॉडी कर्व्ड ग्लास है और रियर से भी कर्व्ड है ताकि इसे होल्ड करने में आसानी हो. कनेक्टिविटी के लिए इन दोनों स्मार्टफोन्स में स्टैंडर्ड फीचर्स दिए गए हैं.
Monday, March 18, 2019
आम चुनाव 2019: वोटर लिस्ट से दो करोड़ महिलाओं के 'ग़ायब' होने का रहस्य
भारत में महिलाओं को वोट देने का अधिकार उसी साल मिल गया था, जिस साल भारत देश बना था. एक औपनिवेशिक राष्ट्र रह चुके भारत के लिए ये एक बड़ी कामयाबी थी.
लेकिन इसके 70 साल बाद 2 करोड़ 10 लाख महिलाओं से वोट देने का अधिकार क्यों छिन लिया गया है? भारत के सामने ये एक बड़ा सवाल है.
भारत में महिलाएं बढ़-चढ़कर मतदान करती रही हैं: इस साल होने वाले आम चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से ज़्यादा रहने का अनुमान है. अधिकतर महिलाओं का कहना है कि वो अपने पसंद के उम्मीदवार को वोट डालेंगी और वो इसके लिए अपने पति या परिवार से नहीं पूछेंगी.
महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए अलग पोलिंग स्टेशन बनाए जाते हैं और महिला पुलिसकर्मियों को उनकी सुरक्षा में लगाया जाता है. पोलिंग स्टेशनों पर कम से कम एक महिला अधिकारी नियुक्त होती है.
2014 में हुए आम चुनावों में 660 से ज़्यादा महिला उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आज़माई थी. 1951 में हुए पहले चुनावों के मुकाबले ये आंकड़ा कहीं ज़्यादा था, क्योंकि उस वक्त महज़ 24 महिलाएं ही चुनावी मैदान में उतरी थीं.
राजनीतिक पार्टियां भी अब महिला मतदाताओं को ख़ास महत्व देती हैं. वो उन्हें एक अलग इकाई मानती हैं और उनके लिए कई वादे करती हैं जैसे सस्ती रसोई गैस देने का वादा, पढ़ाई में स्कॉलरशिप देने का वादा और कॉलेज जाने के लिए साइकिल देने का वादा.
लेकिन ये एक हैरान कर देने वाली बात है कि भारत में बहुत सी महिलाओं का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है. इन महिलाओं की तादाद इतनी है, जितनी श्रीलंका की पूरी आबादी.
ये दावा एक नई किताब में किया गया है. चुनाव विशेषज्ञ प्रणॉय रॉय और दोराब सोपारीवाला ने ये किताब लिखी है. वो कुछ आंकड़ो का अध्ययन कर इस नतीजे पर पहुंचे. इसका ज़िक्र उन्होंने अपनी आने वाली किताब 'द वर्डिक्ट: डिकोडिंग इंडियाज़ इलेक्शन' में किया है.
उन्होंने देखा कि जनगणना के हिसाब से 18 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं की संख्या कितनी है. इस संख्या के आधार पर उन्होंने महिलाओं की मौजूदा तादाद का अंदाज़ा लगाया. इसके बाद उन्होंने इस संख्या की तुलना महिला मतदाताओं की ताज़ा लिस्ट से की.
उन्होंने इन दोनों में बड़ा अंतर पाया. उन्होंने पाया कि महिला मतदाताओं की लिस्ट में करीब दो करोड़ 10 लाख महिलाओं का नाम ही नहीं है.
ग़ायब महिला मतदाताओं में ज़्यादातर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की हैं, जबकि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों में स्थिति फिर भी बेहतर है.
विश्लेषकों का कहना है कि दो करोड़ से ज़्यादा महिलाओं का नाम वोटर लिस्ट से गायब होने का मतलब है कि भारत के हर निर्वाचन क्षेत्र में औसतन 38 हज़ार महिलाएं वोटर लिस्ट में नहीं हैं.
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे ज़्यादा आबादी वाला राज्य है और इस राज्य का चुनावी जीत में अहम योगदान होता है. लेकिन किताब में लिखे आंकड़ों की माने तो उत्तर प्रदेश की हर सीट में 80 हज़ार महिलाओं के नाम वोटर लिस्ट में नहीं है.
यहां ये जान लेना भी ज़रूरी है कि पांच में से कम से कम एक सीट पर हार-जीत का अंतर 38 हज़ार वोटों से कम होता है. मतलब ये कि जिन महिलाओं का नाम वोटर लिस्ट से गायब है, वो कई सीटों पर चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं.
महिलाओं का इतनी बड़ी तादाद में लिस्ट से गायब होना ये भी बताता है कि इस साल गर्मियों में होने वाले चुनाव में मतदाताओं की संख्या और ज़्यादा हो सकती थी.
अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में लिंग अनुपात महिलाओं के विपरीत जाता है तो वहां औसत मतदाता, पुरुष हो जाता है. ऐसे में हो सकता है कि वहां कि महिला मतदाताओं को नज़र अंदाज़ किया जाए.
प्रणॉय रॉय ने बीबीसी को बताया, "महिलाएं मतदान करना चाहती हैं, लेकिन उन्हें मतदान करने नहीं दिया जाता है. ये बहुत ही चिंता की बात है. इससे कई बड़े सवाल भी खड़े होते हैं. हम सभी जानते हैं कि इस समस्या के पीछे कुछ सामाजिक कारण भी हैं. लेकिन हम ये भी जानते हैं कि लोगों को मतदान करने से रोककर नतीजों को भी कंट्रोल किया जा सकता है. क्या ये भी एक कारण है? सच का पता लगाने के लिए हमें इसकी और पड़ताल करनी होगी."
लिंग अनुपात को पुरुषों के पक्ष में कर देने से भारत में एक समस्या ये हुई है कि महिलाओं को लंबे समय से वोट करने का अधिकार नहीं मिला है.
पिछले साल सरकार की एक रिपोर्ट में सामने आई थी कि भारत में महिलाएं पहले से 6.3 करोड़ कम हो गई हैं. इसकी वजह है कि बेटे की चाहत में बेटी को गर्भ में ही मार दिया जाता है और बेटों की ज़्यादा अच्छे से देख-रेख की जाती है.
इसके अलावा अर्थशास्त्री शमिका रवि और मुदित कपूर के अनुमान के मुताबिक 6.5 करोड़ से ज़्यादा महिलाएं कम हो गई हैं. यानी करीब 20 फीसदी महिला मतदाता गायब हैं.
इनमें वो महिलाएं भी हैं जिन्होंने मतदान के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया और वो महिलाएं भी जिन्हें दुनिया में आने ही नहीं दिया गया. उनका कहना है कि ये चुनाव उस आबादी के लिए हो रहे हैं जहां महिलाएं कृत्रिम रूप से कम दिखाई देती हैं.
ऐसा नहीं है कि चुनाव अधिकारियों ने महिलाओं को पोलिंग बूथ तक लाने के लिए कोशिशें नहीं की.
चुनाव आयोग कई तरीकों से कोशिश कर रहा है कि सभी वोटरों को वोट डालने के लिए लाया जाए. इन तरीकों में वो लिंग अनुपात, इलेक्टोर-पॉपुलेशन रेश्यो और मतदाताओं की उम्र को ध्यान रखते हैं.
इसके लिए वो लोगों के घर-घर जाते हैं और इस काम के लिए अक्सर महिला अधिकारियों को भेजा जाता है.
गावों में बाल विकास कर्मचारियों और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को इस काम में लगाया जाता है.
सरकारी टीवी और रेडियो प्रोग्रामों में महिलाओं को रजिस्टर करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. कई पोलिंग स्टेशन सिर्फ़ महिलाओं के लिए ही बनाए जाते हैं.
तो क्या वजह है कि इतनी सारी महिलाएं मतदान करने नहीं आतीं? क्या एक वजह ये हैं कि कई महिलाएं शादी के बाद अपना पता नहीं बदलती हैं और नए पते के साथ रजिस्टर नहीं करती हैं? (30 से 34 की उम्र की तीन फीसदी से भी कम महिलाएं सिंगल हैं.)
क्या इसकी एक वजह ये भी है कि परिवार वाले वोटर लिस्ट में लगाने के लिए महिलाओं की तस्वीर अधिकारियों को नहीं देते हैं? या इसका कुछ इस बात से भी लेना-देना है कि मतदाताओं को दबाने के लिए ये किया जा रहा है?
डॉक्टर रॉय कहते हैं, "कुछ सामाजिक रुकावटें हैं, लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि ये इतनी बड़ी संख्या के वोटर लिस्ट से गायब होने की वजह हो सकता है."
चुनावों का आयोजन करने में मदद करने वालों लोगों का कहना है कि इसमें डरने की कोई बात नहीं है. पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने बीबीसी को कहा कि बीते कुछ वक्त में बहुत सी महिलाओं ने वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि अब भी महिलाओं के सामने कई सामाजिक रुकावटें हैं?
उन्होंने कहा, "मैंने कई ऐसे मां-बाप के बारे में सुना है जो अपनी बेटी का रजिस्ट्रेशन सिर्फ़ इसलिए नहीं कराते कि इससे उनकी बेटी की उम्र का पता चल जाएगा. उन्हें लगता है कि इससे उनकी शादी होने में दिक्कत आ सकती है."
2019 के आम चुनाव होने में एक महीने से भी कम का वक्त बचा है. ऐसे में इस समस्या को सुलझाने के लिए वक्त है ही नहीं.
डॉक्टर रॉय का मानना है कि इसका एक ही तरीका है कि उन महिलाओं को भी वोट करने दिया जाए, जिनका नाम रजिस्टर्ड नहीं है.
वो कहते हैं, "कोई भी महिला जो पोलिंग स्टेशन आती है और वोट डालना चाहती है, अगर वो अपने 18 साल से ज़्यादा होने का सबूत देती है तो उसे वोट देने दिया जाना चाहिए."
लेकिन इसके 70 साल बाद 2 करोड़ 10 लाख महिलाओं से वोट देने का अधिकार क्यों छिन लिया गया है? भारत के सामने ये एक बड़ा सवाल है.
भारत में महिलाएं बढ़-चढ़कर मतदान करती रही हैं: इस साल होने वाले आम चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से ज़्यादा रहने का अनुमान है. अधिकतर महिलाओं का कहना है कि वो अपने पसंद के उम्मीदवार को वोट डालेंगी और वो इसके लिए अपने पति या परिवार से नहीं पूछेंगी.
महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए अलग पोलिंग स्टेशन बनाए जाते हैं और महिला पुलिसकर्मियों को उनकी सुरक्षा में लगाया जाता है. पोलिंग स्टेशनों पर कम से कम एक महिला अधिकारी नियुक्त होती है.
2014 में हुए आम चुनावों में 660 से ज़्यादा महिला उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आज़माई थी. 1951 में हुए पहले चुनावों के मुकाबले ये आंकड़ा कहीं ज़्यादा था, क्योंकि उस वक्त महज़ 24 महिलाएं ही चुनावी मैदान में उतरी थीं.
राजनीतिक पार्टियां भी अब महिला मतदाताओं को ख़ास महत्व देती हैं. वो उन्हें एक अलग इकाई मानती हैं और उनके लिए कई वादे करती हैं जैसे सस्ती रसोई गैस देने का वादा, पढ़ाई में स्कॉलरशिप देने का वादा और कॉलेज जाने के लिए साइकिल देने का वादा.
लेकिन ये एक हैरान कर देने वाली बात है कि भारत में बहुत सी महिलाओं का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है. इन महिलाओं की तादाद इतनी है, जितनी श्रीलंका की पूरी आबादी.
ये दावा एक नई किताब में किया गया है. चुनाव विशेषज्ञ प्रणॉय रॉय और दोराब सोपारीवाला ने ये किताब लिखी है. वो कुछ आंकड़ो का अध्ययन कर इस नतीजे पर पहुंचे. इसका ज़िक्र उन्होंने अपनी आने वाली किताब 'द वर्डिक्ट: डिकोडिंग इंडियाज़ इलेक्शन' में किया है.
उन्होंने देखा कि जनगणना के हिसाब से 18 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं की संख्या कितनी है. इस संख्या के आधार पर उन्होंने महिलाओं की मौजूदा तादाद का अंदाज़ा लगाया. इसके बाद उन्होंने इस संख्या की तुलना महिला मतदाताओं की ताज़ा लिस्ट से की.
उन्होंने इन दोनों में बड़ा अंतर पाया. उन्होंने पाया कि महिला मतदाताओं की लिस्ट में करीब दो करोड़ 10 लाख महिलाओं का नाम ही नहीं है.
ग़ायब महिला मतदाताओं में ज़्यादातर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की हैं, जबकि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों में स्थिति फिर भी बेहतर है.
विश्लेषकों का कहना है कि दो करोड़ से ज़्यादा महिलाओं का नाम वोटर लिस्ट से गायब होने का मतलब है कि भारत के हर निर्वाचन क्षेत्र में औसतन 38 हज़ार महिलाएं वोटर लिस्ट में नहीं हैं.
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे ज़्यादा आबादी वाला राज्य है और इस राज्य का चुनावी जीत में अहम योगदान होता है. लेकिन किताब में लिखे आंकड़ों की माने तो उत्तर प्रदेश की हर सीट में 80 हज़ार महिलाओं के नाम वोटर लिस्ट में नहीं है.
यहां ये जान लेना भी ज़रूरी है कि पांच में से कम से कम एक सीट पर हार-जीत का अंतर 38 हज़ार वोटों से कम होता है. मतलब ये कि जिन महिलाओं का नाम वोटर लिस्ट से गायब है, वो कई सीटों पर चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं.
महिलाओं का इतनी बड़ी तादाद में लिस्ट से गायब होना ये भी बताता है कि इस साल गर्मियों में होने वाले चुनाव में मतदाताओं की संख्या और ज़्यादा हो सकती थी.
अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में लिंग अनुपात महिलाओं के विपरीत जाता है तो वहां औसत मतदाता, पुरुष हो जाता है. ऐसे में हो सकता है कि वहां कि महिला मतदाताओं को नज़र अंदाज़ किया जाए.
प्रणॉय रॉय ने बीबीसी को बताया, "महिलाएं मतदान करना चाहती हैं, लेकिन उन्हें मतदान करने नहीं दिया जाता है. ये बहुत ही चिंता की बात है. इससे कई बड़े सवाल भी खड़े होते हैं. हम सभी जानते हैं कि इस समस्या के पीछे कुछ सामाजिक कारण भी हैं. लेकिन हम ये भी जानते हैं कि लोगों को मतदान करने से रोककर नतीजों को भी कंट्रोल किया जा सकता है. क्या ये भी एक कारण है? सच का पता लगाने के लिए हमें इसकी और पड़ताल करनी होगी."
लिंग अनुपात को पुरुषों के पक्ष में कर देने से भारत में एक समस्या ये हुई है कि महिलाओं को लंबे समय से वोट करने का अधिकार नहीं मिला है.
पिछले साल सरकार की एक रिपोर्ट में सामने आई थी कि भारत में महिलाएं पहले से 6.3 करोड़ कम हो गई हैं. इसकी वजह है कि बेटे की चाहत में बेटी को गर्भ में ही मार दिया जाता है और बेटों की ज़्यादा अच्छे से देख-रेख की जाती है.
इसके अलावा अर्थशास्त्री शमिका रवि और मुदित कपूर के अनुमान के मुताबिक 6.5 करोड़ से ज़्यादा महिलाएं कम हो गई हैं. यानी करीब 20 फीसदी महिला मतदाता गायब हैं.
इनमें वो महिलाएं भी हैं जिन्होंने मतदान के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया और वो महिलाएं भी जिन्हें दुनिया में आने ही नहीं दिया गया. उनका कहना है कि ये चुनाव उस आबादी के लिए हो रहे हैं जहां महिलाएं कृत्रिम रूप से कम दिखाई देती हैं.
ऐसा नहीं है कि चुनाव अधिकारियों ने महिलाओं को पोलिंग बूथ तक लाने के लिए कोशिशें नहीं की.
चुनाव आयोग कई तरीकों से कोशिश कर रहा है कि सभी वोटरों को वोट डालने के लिए लाया जाए. इन तरीकों में वो लिंग अनुपात, इलेक्टोर-पॉपुलेशन रेश्यो और मतदाताओं की उम्र को ध्यान रखते हैं.
इसके लिए वो लोगों के घर-घर जाते हैं और इस काम के लिए अक्सर महिला अधिकारियों को भेजा जाता है.
गावों में बाल विकास कर्मचारियों और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को इस काम में लगाया जाता है.
सरकारी टीवी और रेडियो प्रोग्रामों में महिलाओं को रजिस्टर करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. कई पोलिंग स्टेशन सिर्फ़ महिलाओं के लिए ही बनाए जाते हैं.
तो क्या वजह है कि इतनी सारी महिलाएं मतदान करने नहीं आतीं? क्या एक वजह ये हैं कि कई महिलाएं शादी के बाद अपना पता नहीं बदलती हैं और नए पते के साथ रजिस्टर नहीं करती हैं? (30 से 34 की उम्र की तीन फीसदी से भी कम महिलाएं सिंगल हैं.)
क्या इसकी एक वजह ये भी है कि परिवार वाले वोटर लिस्ट में लगाने के लिए महिलाओं की तस्वीर अधिकारियों को नहीं देते हैं? या इसका कुछ इस बात से भी लेना-देना है कि मतदाताओं को दबाने के लिए ये किया जा रहा है?
डॉक्टर रॉय कहते हैं, "कुछ सामाजिक रुकावटें हैं, लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि ये इतनी बड़ी संख्या के वोटर लिस्ट से गायब होने की वजह हो सकता है."
चुनावों का आयोजन करने में मदद करने वालों लोगों का कहना है कि इसमें डरने की कोई बात नहीं है. पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने बीबीसी को कहा कि बीते कुछ वक्त में बहुत सी महिलाओं ने वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि अब भी महिलाओं के सामने कई सामाजिक रुकावटें हैं?
उन्होंने कहा, "मैंने कई ऐसे मां-बाप के बारे में सुना है जो अपनी बेटी का रजिस्ट्रेशन सिर्फ़ इसलिए नहीं कराते कि इससे उनकी बेटी की उम्र का पता चल जाएगा. उन्हें लगता है कि इससे उनकी शादी होने में दिक्कत आ सकती है."
2019 के आम चुनाव होने में एक महीने से भी कम का वक्त बचा है. ऐसे में इस समस्या को सुलझाने के लिए वक्त है ही नहीं.
डॉक्टर रॉय का मानना है कि इसका एक ही तरीका है कि उन महिलाओं को भी वोट करने दिया जाए, जिनका नाम रजिस्टर्ड नहीं है.
वो कहते हैं, "कोई भी महिला जो पोलिंग स्टेशन आती है और वोट डालना चाहती है, अगर वो अपने 18 साल से ज़्यादा होने का सबूत देती है तो उसे वोट देने दिया जाना चाहिए."
Friday, March 15, 2019
दिल्ली पुलिस के एक्शन के खिलाफ चुनाव आयोग के बाहर धरने पर बैठे AAP नेता
दिल्ली की सियासत में आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच मचे घमासान ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है. आम आदमी पार्टी ने दिल्ली पुलिस पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है और इसे लेकर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है. यही नहीं, चुनाव आयोग में शिकायत के बावजूद साउथ दिल्ली में दोबारा कॉल सेंटर पर दिल्ली पुलिस की रेड के खिलाफ आप नेता और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज समेत तमाम दूसरे बड़े नेता चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंच गए और उसके बाहर धरना शुरू कर दिया है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की है. केजरीवाल ने लिखा, 'सभी MLA और सभी लोग चुनाव आयोग पहुंचें. आज चुनाव आयोग को बताना पड़ेगा कि हमारे ऊपर रेड क्यों करवाई जा रही हैं. हमारा कसूर क्या है?'
दिल्ली से हटाए गए 63 हजार से ज्यादा पोस्टर्स
इससे पहले आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि दिल्ली में लगे पोस्टरों से सिर्फ आम आदमी को ही गायब किया जा रहा है. इस बीच चीफ इलेक्शन ऑफसर ने शुक्रवार को कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद से दिल्ली में 63,449 पोस्टर्स/बैनर्स और होर्डिंग्स हटाए गए हैं. साथ ही 137 एफआईआर एक्साइज एक्ट के तहत दर्ज किए गए हैं. वहीं, आर्म्स एक्ट के तहत 44 मामले दर्ज किए गए हैं.
'भाजपा ने कटवाए थे 24 लाख वोट'
AAP के मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, राघव चड्ढा और अतिशी मरलेना ने चुनाव आयोग में शिकायत की है कि बीजेपी ने जिन 24 लाख वोटों को कटवाया था, उन्हें लिस्ट में शामिल करवाने के लिए उन्होंने कॉल सेंटर से करार किया था. लेकिन बीजेपी के इशारे पर दिल्ली पुलिस ने न केवल कॉल सेंटर के लोगों को हिरासत में लिया है, बल्कि अवैध तरीके से कॉल सेंटर में काम करने वालों के घर का पता पूछ रही है.
मनीष सिसोदिया ने पुलिस अधिकारी राजीव रंजन, पंकज सिंह और सतीश गोलचा पर दिल्ली पुलिस के इशारे पर कॉल सेंटर कर्मियों को टॉर्चर करने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से उन्हें सस्पेंड करने की मांग की है. उन्होंने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर 24 लाख वोट गलत तरीके से काटे गए. हमने पहले भी इसकी शिकायत चुनाव से की थी.'
'कॉल सेंटर के मालिकों को मिल रही धमकी'
सिसोदिया ने कहा, 'हमने डोर टू डोर कैंपेन करके नंबर इकट्ठा किया है. अब हम कैंपेनिंग कर रहे हैं और उनके वोट बनवा रहे हैं. हमने उनकी मदद की है लोगों ने अपना वोट भी बनवाया है. लेकिन जिस कॉल सेंटर के जरिए हम यह अभियान चला रहे थे. दिल्ली पुलिस भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर उस कॉल सेंटर को रोजाना रेट कर रही है. रोजाना कॉल सेंटर के मालिकों को दफ्तर में बिठाकर परेशान किया जाता है. उन्हें धमकाया जाता है कि अगर आम आदमी पार्टी के लिए काम करना बंद नहीं किया तो तुम्हें ठोक देंगे बर्बाद कर देंगे. रोजाना दिल्ली पुलिस की यह करतूत चल रही है. अब जबकि देश में चुनाव आचार संहिता लग चुकी है सभी पार्टियों को सुगम चुनाव करने का वातावरण देना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है.'
पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड करने की मांग
सिसोदिया ने चुनाव आयोग से शिकायत में कहा है, 'भारतीय जनता पार्टी से प्रभावित पुलिस गुंडों की तरह काम कर रही है. कॉल सेंटर के लोगों को बुलाकर थाने में बिठाया जाता है. दफ्तर में बैठा कर उन्हें रोजाना परेशान किया जा रहा है, प्रताड़ित किया जा रहा है. उन्होंने शिकायत में दिल्ली पुलिस के सीनियर अधिकारी सतीश गोलचा समेत दो अधिकारी राजीव रंजन और पंकज सिंह को सस्पेंड करने की मांग की है.'
उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि यह तीनों भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर दिल्ली के लोगों को परेशान कर रहे हैं. जिनके वोट कट गए थे और उनके वोट को बनवाने के काम में बाधा डाल रहे हैं. कॉल सेंटर के मालिकों को अवैध तरीके से रोजाना बुला बुला कर बिठाया जाता है और कॉल सेंटर के ऊपर दबाव डाल रहे हैं कि जितने लड़के-लड़कियां यहां काम कर रहे हैं, उनके पते दीजिए जितने लोग काम कर रहे हैं, उनका डाटा दीजिए. यह गलत है इसमें कॉल सेंटर कर्मचारी की क्या गलती है.
'सुपारी किलर की तरह हो रहा बर्ताव'
सिसोदिया ने कहा, 'कॉल सेंटर का आम आदमी पार्टी के साथ एग्रीमेंट है. आम आदमी पार्टी ने उनको हायर किया है. आप आम आदमी पार्टी से बात करो, आप अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से बात करो, संजय सिंह से बात करो, राघव चड्ढा से बात करो. आप हमसे बात नहीं कर रहे और आप कॉल सेंटर के कर्मियों को धमका रहे हो. सुपारी किलर की तरह बर्ताव कर रहे हो. अधिकारियों के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाए और सस्पेंड किया जाए.' उन्होंने कहा है कि चुनाव आयोग ने शिकायत ले ली है. जितनी 2400000 काटे गए थे उसकी पूरी लिस्ट उन्होंने चुनाव आयोग को दे दी है.य हम इसकी पूरी जांच कराएंगे.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की है. केजरीवाल ने लिखा, 'सभी MLA और सभी लोग चुनाव आयोग पहुंचें. आज चुनाव आयोग को बताना पड़ेगा कि हमारे ऊपर रेड क्यों करवाई जा रही हैं. हमारा कसूर क्या है?'
दिल्ली से हटाए गए 63 हजार से ज्यादा पोस्टर्स
इससे पहले आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि दिल्ली में लगे पोस्टरों से सिर्फ आम आदमी को ही गायब किया जा रहा है. इस बीच चीफ इलेक्शन ऑफसर ने शुक्रवार को कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद से दिल्ली में 63,449 पोस्टर्स/बैनर्स और होर्डिंग्स हटाए गए हैं. साथ ही 137 एफआईआर एक्साइज एक्ट के तहत दर्ज किए गए हैं. वहीं, आर्म्स एक्ट के तहत 44 मामले दर्ज किए गए हैं.
'भाजपा ने कटवाए थे 24 लाख वोट'
AAP के मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, राघव चड्ढा और अतिशी मरलेना ने चुनाव आयोग में शिकायत की है कि बीजेपी ने जिन 24 लाख वोटों को कटवाया था, उन्हें लिस्ट में शामिल करवाने के लिए उन्होंने कॉल सेंटर से करार किया था. लेकिन बीजेपी के इशारे पर दिल्ली पुलिस ने न केवल कॉल सेंटर के लोगों को हिरासत में लिया है, बल्कि अवैध तरीके से कॉल सेंटर में काम करने वालों के घर का पता पूछ रही है.
मनीष सिसोदिया ने पुलिस अधिकारी राजीव रंजन, पंकज सिंह और सतीश गोलचा पर दिल्ली पुलिस के इशारे पर कॉल सेंटर कर्मियों को टॉर्चर करने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से उन्हें सस्पेंड करने की मांग की है. उन्होंने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर 24 लाख वोट गलत तरीके से काटे गए. हमने पहले भी इसकी शिकायत चुनाव से की थी.'
'कॉल सेंटर के मालिकों को मिल रही धमकी'
सिसोदिया ने कहा, 'हमने डोर टू डोर कैंपेन करके नंबर इकट्ठा किया है. अब हम कैंपेनिंग कर रहे हैं और उनके वोट बनवा रहे हैं. हमने उनकी मदद की है लोगों ने अपना वोट भी बनवाया है. लेकिन जिस कॉल सेंटर के जरिए हम यह अभियान चला रहे थे. दिल्ली पुलिस भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर उस कॉल सेंटर को रोजाना रेट कर रही है. रोजाना कॉल सेंटर के मालिकों को दफ्तर में बिठाकर परेशान किया जाता है. उन्हें धमकाया जाता है कि अगर आम आदमी पार्टी के लिए काम करना बंद नहीं किया तो तुम्हें ठोक देंगे बर्बाद कर देंगे. रोजाना दिल्ली पुलिस की यह करतूत चल रही है. अब जबकि देश में चुनाव आचार संहिता लग चुकी है सभी पार्टियों को सुगम चुनाव करने का वातावरण देना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है.'
पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड करने की मांग
सिसोदिया ने चुनाव आयोग से शिकायत में कहा है, 'भारतीय जनता पार्टी से प्रभावित पुलिस गुंडों की तरह काम कर रही है. कॉल सेंटर के लोगों को बुलाकर थाने में बिठाया जाता है. दफ्तर में बैठा कर उन्हें रोजाना परेशान किया जा रहा है, प्रताड़ित किया जा रहा है. उन्होंने शिकायत में दिल्ली पुलिस के सीनियर अधिकारी सतीश गोलचा समेत दो अधिकारी राजीव रंजन और पंकज सिंह को सस्पेंड करने की मांग की है.'
उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि यह तीनों भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर दिल्ली के लोगों को परेशान कर रहे हैं. जिनके वोट कट गए थे और उनके वोट को बनवाने के काम में बाधा डाल रहे हैं. कॉल सेंटर के मालिकों को अवैध तरीके से रोजाना बुला बुला कर बिठाया जाता है और कॉल सेंटर के ऊपर दबाव डाल रहे हैं कि जितने लड़के-लड़कियां यहां काम कर रहे हैं, उनके पते दीजिए जितने लोग काम कर रहे हैं, उनका डाटा दीजिए. यह गलत है इसमें कॉल सेंटर कर्मचारी की क्या गलती है.
'सुपारी किलर की तरह हो रहा बर्ताव'
सिसोदिया ने कहा, 'कॉल सेंटर का आम आदमी पार्टी के साथ एग्रीमेंट है. आम आदमी पार्टी ने उनको हायर किया है. आप आम आदमी पार्टी से बात करो, आप अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से बात करो, संजय सिंह से बात करो, राघव चड्ढा से बात करो. आप हमसे बात नहीं कर रहे और आप कॉल सेंटर के कर्मियों को धमका रहे हो. सुपारी किलर की तरह बर्ताव कर रहे हो. अधिकारियों के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाए और सस्पेंड किया जाए.' उन्होंने कहा है कि चुनाव आयोग ने शिकायत ले ली है. जितनी 2400000 काटे गए थे उसकी पूरी लिस्ट उन्होंने चुनाव आयोग को दे दी है.य हम इसकी पूरी जांच कराएंगे.
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