Friday, May 17, 2019

中美贸易战事升级 数据显真相专家论输赢

中美贸易战最近几天可谓战事升级硝烟滚滚,双方都宣布了向对方商品的新征关税措施,数额之大让全球金融市场震荡。

美国总统特朗普一再表示,中国将为关税买单,尽管他的经济顾问库德洛(Larry Kudlow)周日承认,实际上从中国进口的商品是美国公司在交关税。

那么这场贸易战真的像特朗普所说对美国有百利而无一害吗?真的为美国财政带来数以亿计美元的收入吗?

贸易战扩大,到底谁是最大的输家呢?
美国跨国律师行Cooley LLP的律师克里斯托弗·邦迪(Christophy Bondy)认定,向美国政府交关税的是美国的进口商,而不是中国公司。

克里斯托弗·邦迪,曾在加拿大欧盟自由贸易协议谈判过程中担任加拿大政府的高级顾问。他说,美国进口商因交关税而增加的额外成本,很可能用加价的方式直接转嫁到美国消费者身上。

他说:“关税对供应链有很大的破坏作用。”

中美贸易谈判:特朗普突然威胁加征关税 最后阶段的“硬骨头”和不确定因素
中美贸易战: 两国之间高科技较量激战正酣
关税对中国的影响
中国2018年出口上升7%,仍然稳居美国头号贸易伙伴的地位。但是中国对美国的贸易在2018年下滑了9%,显示贸易战的威力已经开始显现。

尽管如此,英国剑桥大学贸易问题专家梅利迪斯·克罗利博士(Meredith Crowley)说,没有任何证据显示,中国公司已经开始减价来吸引美国公司买货。

“(中国)有些经销高补贴产品的出口商已经退出了市场,因为美国公司开始从其他地方进口。这些中国公司的利润空间太小了,关税显然对他们有影响。”

“但我认为,那些有市场优势的(中国)产品并没有减价,可能是因为美国进口商对他们有很大的依赖性。”

关税对美国的影响
根据今年3月的两份研究报告,美国去年向中国和其他国家进口商品征税的全部代价,几乎全部由美国商界和消费者来承担。

纽约联邦储备银行、普里斯顿大学和哥伦比亚大学的经济学家经过计算得出结论说,向钢铁、洗衣机等在内的众多进口商品征收高关税,让美国公司和消费者,在缴税之外每月额外支出30亿美元。

他们的统计结果还指出,受需求不振的影响,另外还有14亿美元的损失。

第二份权威研究报告由多位作者执笔撰写,其中包括世界银行首席经济学家佩妮洛皮∙戈德堡(Pinelopi Goldberg)。该报告发现美国消费者和公司承担了关税成本的绝大部分。

根据这份报告的分析,把其他国家的反制措施考虑在内,那些在美国2016年大选中支持特朗普的地区内的农民和蓝领工人,是贸易战最大的受害者。

美国买其他国家的货品不行吗?
特朗普在中美贸易战中表示,那些原本从中国进口商品的美国公司应该到别的地方进货,譬如越南,或者干脆直接购买美国厂家的商品

但美国跨国律师行Cooley LLP的律师克里斯托弗·邦迪说,这并不像特朗普说的那么简单。

“生产和价值链要重新定位,需要相当长的时间,而且都有代价。”

“例如,美国去年向钢征收高关税,但美国不可能突然之间就能建起数百家新钢厂。另外,中国是一个生产大国,对手们都相形见绌,要在全球供应链中取代中国谈何容易。

增加贸易关税有用吗?
剑桥大学的克罗利博士和美国Cooley LLP的律师克里斯托弗·邦迪都表示,几乎没有什么证据证明增加贸易关税有过任何作用。

来看看以往的例子:

2009年,美国时任总统奥巴马曾对中国生产的汽车轮胎大幅度增加关税35%,称中国轮胎进口数量飙升让美国工人失业。

但是,2012年彼得森国际经济研究所(Peterson Institute for International Economics)的研究发现,2011年,美国消费者因为轮胎价格上涨所承担的代价大约为11亿美元。

这个研究认为,虽然向中国轮胎征收关税使美国制造业得以保住了1200个工作职位,但是美国消费者额外付出了这笔11亿美元的额外开支后,减少了在其他零售商品上的开销,“间接导致了零售业就业率的下降”。

该研究还指出:“更进一步的损失是,中国采取报复行动,对进口的美国鸡肉也征收了反倾销关税,导致美国养鸡行业损失了大约10亿美元的销售额。”

用来证明增加关税有用的一个常用的例子,是美国总统罗纳德·里根1983年决定对日本生产的摩托车大幅度提高进口关税。

此举被认为让困难重重的美国摩托车制造商哈利·戴维森(Harley Davidson)免去了来自国外的激烈竞争,里根总统功不可没。

但有人认为,这跟里根总统增加进口日本摩托车的关税没有关系。哈利·戴维森公司能扭亏为盈得益于本身的努力,其中包括改造工厂生产线,研发性能更优良的发动机。这些才是让该公司走出困境的有效手段。

美国关税能迫使中国达成协议吗?
剑桥大学的克罗利博士说,美国总统特朗普新增的关税可能会让中国重回谈判桌,但是她并不认为中国就会因此作出重大的让步。

“的确,中国经济增长放缓问题比以前多,中国从美国的进口贸易远远超过向美国的出口贸易,所以中国在贸易战中的损失会大些。”

“但是他们并不想改变自己的法律,即便中国真愿意改变法律,中国有司法传统来执行吗?”

美国跨国律师行Cooley LLP的律师克里斯托弗·邦迪认为,特朗普威胁增加关税更多是为了扩大选民基础,制造头条新闻。

“要让人们了解中美谈判中所涉及的原则问题,如国有企业的行为、保护知识产权、公平市场准入和保护工人以及环境等等非常困难,而主打关税就容易多了。

Wednesday, May 8, 2019

स्पाइस 2000 बम का एडवांस वर्जन खरीदने की तैयारी, बालाकोट स्ट्राइक में इस्तेमाल हुए थे

खेल डेस्क. आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर ने अपने छात्रों से प्रश्न पत्र में धोनी से जुड़ा एक सवाल पूछा। प्रश्न पत्र में सवाल था कि चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान एमएस धोनी को मुंबई इंडियंस के खिलाफ आईपीएल के पहले क्वालिफायर मैच में टॉस जीतने के बाद क्या करना चाहिए? अतंरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर प्रश्न पत्र का स्क्रीनशॉट शेयर किया।

डे-नाइट मैच में पिच के व्यवहार को लेकर किया सवाल
आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर विग्नेश मुथुविजयन ने छात्रों से पूछा, "दिन- रात के खेल में ओस की प्रमुख भूमिका होती है। फील्ड में ओस गेंद को गीला कर देती है, जिसकी वजह से स्पिनरों के लिए गीली गेंद को पकड़ना और स्पिन कराना मुश्किल हो जाता है। वहीं तेज गेंदबाजों के लिए सही लेंथ पर गेंद करना भी मुश्किल हो जाता है।"

सवाल इस प्रकार था, "आईपीएल 2019 में 7 मई को चेन्नई सुपरकिंग्स का चेपक स्टेडियम में क्वालिफायर-1 मैच है। सात मई के मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार, चेन्नई में 70% नमी रहने की उम्मीद है। खेल के शुरुआत में तापमान 39°C रहने का अनुमान है। दूसरी पारी के शुरुआत में तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। इस जानकारी के आधार पर अगर एमएस धोनी टॉस जीतते हैं, तो आप पहले बल्लेबाजी करने की सलाह देंगे या फील्डिंग। तथ्य के साथ जवाब दें।"

मंगलवार को खेले गए पहले क्वालिफायर मैच में धोनी ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 4 विकेट पर 131 रन बनाए। मुंबई ने 18.3 ओवर में 4 विकेट पर 132 रन बनाकर जीत हासिल की।

खिताबी मुकाबला 12 मई को हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम पर खेला जाएगा। चेन्नई की टीम 10 मई को क्वालिफायर-2 में खेलेगी। उसका मुकाबला 8 मई को होने वाले एलिमिनेटर के विजेता से होगा।

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को 1985 से 1994 के बीच कैसिनो और रिएल एस्टेट के बिजनेस में 1.17 अरब डॉलर (8073 करोड़ रुपए) का घाटा हुआ था। घाटे की वजह से ट्रम्प को इन 10 सालों में 8 बार कोई टैक्स भरने की जरूरत भी नहीं पड़ी। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स (एनवायटी) ने ट्रम्प के टैक्स रिटर्न्स से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया है। ये दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। यह रिपोर्ट इसलिए अहम है क्योंकि 2016 में राष्ट्रपति के चुनाव के प्रचार में ट्रम्प ने खुद को कुशल कारोबारी और मोलभाव करने में माहिर बताया था।

ट्रम्प को 2 साल में 50 करोड़ डॉलर का घाटा हुआ था
एनवायटी की रिपोर्ट के मुताबिक 1990 में ट्रम्प को बिजनेस में 25 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ। 1991 में भी इतना ही घाटा हुआ। यह उच्च आय वाले किसी अन्य अमेरिकी इंडिविजुअल के घाटे की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा था।

ऐसा नहीं है कि ट्रम्प को कभी फायदा ही नहीं हुआ हो। ट्रम्प ने 1985 में मैनहट्टन के मोरिट्स होटल को 7.37 करोड़ डॉलर में खरीदा था। 1989 में इसे 18 करोड़ डॉलर में बेचा। लेकिन ट्रम्प का घाटा इतना ज्यादा था कि उस साल भी उन्हें टैक्स नहीं चुकाना पड़ा।

2016 में राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रम्प ने बेटे को कारोबार संभला दिया था। राष्ट्रपति बनने के बाद टैक्स रिटर्न की जानकारी देने से इनकार कर उन्होंने दशकों पुरानी परंपरा भी तोड़ दी। उन्होंने कहा कि जब तक उनके रिटर्न का ऑडिट नहीं हो जाता वो जानकारी नहीं दे सकते। ट्रम्प के टैक्स संबंधी आंकड़ों के जरिए डेमोक्रेट्स इस बात की जांच करना चाहते हैं कि कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं है क्योंकि ट्रम्प बिजनेस से भी जुड़े हुए हैं।

राज्य के पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से कहा कि घटना में पांच लोगो को नामज़द किया गया है और अभियुक्तों की तलाश के लिए 14 टीमें गठित की गई हैं.

डीजीपी गर्ग ने कहा कि पुलिस ने घटना को गंभीरता से लिया है. पीड़िता की मेडिकल और फॉरेंसिक जांच की जा रही है.

प्रदर्शन में शामिल अलवर ज़िले के दलित कार्यकर्ता चरण सिंह ने बीबीसी को बताया कि घटना 26 अप्रैल की है. पीड़िता अपने पति के साथ मोटरसाइकिल पर जा रही थी. तभी पांच लोगो ने उन्हें घेर कर रोक लिया और सुनसान जगह ले जाकर पति के सामने ही पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया.

Thursday, May 2, 2019

इशरत जहाँ केस: डीजी वंज़ारा और अमीन को कोर्ट ने आरोपमुक्त किया

सीबीआई की विशेष अदालत ने इशरत जहाँ फर्ज़ी मुठभेड़ मामले में गुजरात के पूर्व पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा और एनके अमीन को आरोपमुक्त कर दिया है.

गुजरात सरकार ने सीआरपीसी की धारा 197 के तहत इनके ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने की मंज़ूरी नहीं दी थी. वंज़ारा और अमीन इशरत जहाँ फर्ज़ी मुठभेड़ मामले में अभियुक्त थे.

इसके बाद वंजारा और अमीन ने कोर्ट में उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही खत्म करने की अपील की थी. गुरुवार को विशेष अदालत ने वंज़ारा और अमीन के ख़िलाफ़ आरोप हटा लेने का फ़ैसला सुनाया और दोनों को आरोपमुक्त कर दिया.

इससे पहले, कोर्ट ने मामले की सुनवाई 16 अप्रैल को पूरी कर ली थी.

सीआरपीसी की धारा 197 के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए राज्य सरकार से मंज़ूरी लेना आवश्यक है. इसी मामले में अदालत ने पहले दोनों को आरोपमुक्त करने की याचिका खारिज कर दी थी.

इशरत जहां की माँ शमीमा कौसर ने अपनी याचिका में कहा था कि सीआरपीसी की धारा 197 के तहत लोक सेवक पर मुकदमा चलाने के लिये मंज़ूरी की ज़रूरत होती है लेकिन यह इस मामले पर लागू नहीं होता है क्योंकि यह अपहरण, कैद में रखने और हत्या का मामला है, जो लोक सेवक की आधिकारिक ड्यूटी के दायरे में नहीं आता है.

वंजारा ने कहा, "गुजरात पुलिस के द्वारा जो भी एनकाउंटर्स किए गए आतंकवादियों के...वे विदेशी थे, कई देश में से भी थे, वे राष्ट्रविरोधी थे और देशद्रोही थे. उन लोगों का उद्देश्य गुजरात की क़ानून-व्यवस्था को ख़त्म करने का था. उनका उद्देश्य उस वक्त के मुख्यमंत्री नरेंद्र भाई मोदी की हत्या करने का था. गुजरात की पुलिस ने जो भी किया वो क़ानून के अंतर्गत किया, कोई ग़ैरक़ानूनी कार्रवाई नहीं की थी. लेकिन फिर भी कुछ राजनीतिक साजिशें गुजरात पुलिस के ख़िलाफ़ हुईं और हमारे असली एनकाउंटर्स को फ़ेक बताकर झूठे केस किए. इनके तहत हमें आठ-आठ साल जेल में रहना पड़ा."

सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा है, "2014 के बाद जो भी केस हैं, उनमें जाँच एजेंसियों पर इस तरह दबाव बना है. मैं तो कहूँगी कि डायरेक्टली दिल्ली से दबाव बना है. ताकि वो तहक़ीक़ात और जो सबूत पहले इकट्ठा हुए थे, वो कोर्ट के सामने न रखे जा सकें."

उन्होंने कहा कि इशरत जहाँ की माँ शमीमा कौसर ने अपने हलमनामे में सारे सबूत पेश किए थे, लेकिन अफ़सोस की बात है कि कोर्ट ने इन्हें नज़रअंदाज़ किया है.

वे पहले क्राइम ब्रांच में थे और बाद में गुजरात एटीएस यानी एंटी टैररिस्ट स्क्वाड के प्रमुख रहे. उसके बाद पाकिस्तान सीमा से सटी बॉर्डर रेंज के आईजी रहे.

वे 2002 से 2005 तक अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस थे. उनकी इस पोस्टिंग के दौरान करीब बीस लोगों का एनकाउंटर हुआ. बाद में सीबीआई जाँच में पता चला कि ये एनकाउंटर फ़र्ज़ी थे. कहा जाता है कि वे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे क़रीबी पुलिस अधिकारी थे.

वंज़ारा को 2007 में गुजरात सीआईडी ने गिरफ़्तार किया था और उसके बाद वे जेल गए. उन पर अभी आठ लोगों की हत्या का आरोप था, जिनमें सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौसर बी, तुलसीराम प्रजापति, सादिक़ जमाल, इशरत और उसके साथ मारे गए तीन अन्य लोग शामिल हैं.

इनके एनकाउंटर के बाद क्राइम ब्रांच ने सफ़ाई दी थी कि ये सभी पाकिस्तानी आतंकी थे और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की जान लेना चाहते थे. बाद में कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जाँच हुई, तो साबित हुआ कि ये सभी एनकाउंटर फ़र्ज़ी थे.

सितंबर 2014 में मुंबई की एक अदालत ने वंज़ारा को सोहराबुद्दीन, तुलसीराम प्रजापति के फर्ज़ी मुठभेड़ मामले में ज़मानत दे दी थी.

साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने जब सोहराबुद्दीन केस को ट्रायल के लिए गुजरात से महाराष्ट्र स्थानांतरित किया, तब से वंज़ारा मुंबई जेल में थे. माना जाता है कि मुंबई जेल में रहने के कारण वंज़ारा काफ़ी निराश हो गए थे और इसी कारण उन्होंने सितंबर 2013 में इस्तीफ़ा दे दिया था.

डीजी वंज़ारा से पहले भी गुजरात के कई अन्य पुलिस अफ़सरों ने इस्तीफ़ा दिया था. सबसे पहले आईपीएस अधिकारी रहे संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा देकर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ दंगों में शामिल होने का आरोप लगाया था.

Friday, April 19, 2019

प्रियंका चतुर्वेदी कांग्रेस का दामन छोड़ शिव सेना में शामिल हुईं

"बीजेपी-शिव सेना का फ़ेवरिट गाना- खुल्लम खुल्ला करप्शन करें हम दोनों, दुनिया से नहीं डरें हम दोनों."

"जब मोदीजी ने कहा न खाऊँगा, न खाने दूँगा, सत्ता में उनकी सहयोगी शिव सेना ने सुना- तुम मुझे फ़ेवर्स दो, मैं तुम्हें क्लीयरेंस दूँगा."

कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर शिव सेना का दामन थामने वाली प्रियंका चतुर्वेदी ने ये ट्वीट तकरीबन तीन साल पहले 24 अप्रैल 2016 को किया था. तब उन्हें अंदाज़ा भी नहीं होगा कि जिस पार्टी के लिए वो ये पैरोडी ट्विटर पर लिख रही हैं, एक दिन उन्हें उस पार्टी को ही गले लगाना होगा.

कहते हैं राजनीति में कोई दुश्मन स्थाई नहीं होता. सियासी हालात कब-क्या करवट ले लें, इसके बारे में पक्के तौर पर तो छोड़िए, अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है.

प्रियंका ने शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में शिव सेना ज्वाइन की. उन्होंने कहा कि वो मुंबई के लिए काम करना चाहती हैं और यही वजह है कि वह शिव सेना में शामिल हो रही हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि उनके पुराने बयानों और ट्वीट को निकाला जाएगा, लेकिन उन्होंने सोच समझकर शिव सेना में शामिल होने का फ़ैसला किया है.

इससे पहले, प्रियंका चतुर्वेदी ने कांग्रेस के प्रवक्ता सहित पार्टी के सभी पदों से त्याग पत्र दे दिया. प्रियंका ने बुधवार को ट्वीट कर कहा था कि कांग्रेस पार्टी में अपना ख़ून-पसीना देने वाले लोगों की जगह बदमाशों को प्राथमिकता देने पर उन्हें गहरा दुख हुआ है.

इसके बाद उन्होंने लिखा था कि वह पार्टी के लिए गाली-पत्थर सबका सामना करती हैं, लेकिन पार्टी के अंदर उन्हें धमकाने वालों को मामूली सज़ा भी न होना दुर्भाग्यपूर्ण है.

प्रियंका चतुर्वेदी ने एक पत्रकार के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए यह बात कही है. दरअसल, उस पत्रकार ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के एक नोटिस को ट्वीट किया था.

इस नोटिस में कहा गया था कि मथुरा में कथित तौर पर प्रियंका चतुर्वेदी के साथ दुर्व्यवहार करने वाले कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की अनुशासनात्मक कार्यवाही को निरस्त किया जाता है.

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी की ओर से जारी किए गए नोटिस में लिखा है कि बीते दिनों मथुरा में कांग्रेस कमिटी की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी की रफ़ाल सौदे पर प्रेस कॉन्फ़्रेस के दौरान मथुरा ज़िलाध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत आठ लोगों ने अमर्यादित व्यवहार किया था. इसके बाद उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी.

नोटिस में लिखा गया है कि इस पर इन लोगों ने माफ़ी मांग ली जिसके बाद कांग्रेस महासचिव और पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया के कहने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई को निरस्त कर दिया गया है.

बीबीसी से बातचीत में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष आर.पी. त्रिपाठी ने कहा कि दुर्व्यवहार करने वाले कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने माफ़ी मांग ली थी जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई को निरस्त कर दिया गया.

उन्होंने कहा कि अगर कोई माफ़ी मांगता है तो उसे माफ़ भी कर दिया जाना चाहिए और इस मसले को ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए.

बीते साल सितंबर में प्रियंका चतुर्वेदी मथुरा गई थीं जहां उन्होंने रफ़ाल सौदे पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. प्रियंका मूलतः मथुरा से ही हैं.

उन्होंने इस दौरान स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत शीर्ष नेतृत्व से की जिसके बाद ज़िलाध्यक्ष अशोक सिंह चकलेश्वर और महासचिव उमेश पंडित समेत आठ लोगों को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया था.

पार्टी ने अब इन कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई को निरस्त कर दिया है इस पर उमेश पंडित का कहना है कि उन्हें कभी अपने ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई के बारे में मालूम ही नहीं था, वह तो तब भी कांग्रेस के लिए काम कर रहे थे और आज भी कर रहे हैं.

उमेश पंडित ने सितंबर में हुई घटना पर बीबीसी से कहा, "जब इस घटना के होने की बात कही जा रही है उस समय मैं अपने पिता के पास अस्पताल में था लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसा कुछ हुआ भी नहीं था. अगर ऐसे हुआ था तो उन्होंने पुलिस को शिकायत क्यों नहीं की. यह सब पूर्व विधायक प्रदीप माथुर के साथ उनकी बातचीत के बाद हुआ था क्योंकि वह हमसे बात ही नहीं करती थीं."

प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने ट्वीट में कहा है कि ख़ून-पसीना देने वाले उन जैसे कार्यकर्ताओं की जगह बदमाशों को तरजीह दी जा रही है, इस पर उमेश पंडित कहते हैं, "हमें गुंडा कैसे कह सकती हैं वो. हम वो लोग हैं जिनके घर में आज़ाद हिंद फ़ौज की स्थापना हुई थी. हम 27 साल से कांग्रेस में हैं और कांग्रेस में रहेंगे. ज़िलाध्यक्ष अशोक चकलेश्वर तीन बार के सांसद रहे चकलेश्वर सिंह के पुत्र हैं. उन्होंने मथुरा में रिफ़ाइनरी लगवाई और इंदिरा गांधी जब भी मथुरा आती थीं उनके यहां रुकती थीं. तो वह कैसे हमें बदमाश कह सकती हैं."

कांग्रेस कवर करने वाले पत्रकारों का कहना है कि प्रियंका चतुर्वेदी मथुरा से आती हैं लेकिन उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि महाराष्ट्र से जुड़ी हुई है और वह मुंबई उत्तर-पश्चिम से लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखती थीं. हालांकि कांग्रेस ने वहां से इस बार संजय निरुपम को उम्मीदवार बनाया है.

मुंबई उत्तर-पश्चिम से पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष गुरुदास कामत सांसद रहे हैं और प्रियंका चतुर्वेदी पहले कामत की टीम में भी काम कर चुकी हैं.

पत्रकारों का यह भी मानना है कि मुंबई उत्तर-पश्चिम से सीट फ़ाइनल होने के बाद प्रियंका मथुरा से चुनाव लड़ने की इच्छा रखती थीं लेकिन वहां से कांग्रेस ने महेश पाठक को उम्मीदवार बना दिया.

विश्लेषकों का कहना है कि प्रियंका इन सबसे अधिक तब ख़फ़ा हुईं जब उनसे कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने वाले कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई को वापस ले लिया.

उमेश पंडित कहते हैं कि प्रियंका मथुरा से चुनाव लड़ना चाहती थीं इसी कारण वह ग़ुस्से में हैं और ऐसे समय में जब 18 अप्रैल को मथुरा में वोटिंग है तब उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था.

Monday, April 15, 2019

आईपीएल-12: जडेजा के तीन चौकों ने कैसे मैच का पासा पलटा

रविवार को आईपीएल-12 में दो मुक़ाबले खेले गए जहां पहले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स ने कोलकाता नाइट राइडर्स को पांच विकेट से हराया.

वहीं, दूसरे मैच में दिल्ली कैपिटल्स ने सनराइज़र्स हैदराबाद को उसी के घर में 39 रन से बड़ी हार का स्वाद चखाया.

सबसे पहले बात दूसरे मैच की.

इस मुक़ाबले में सनराइज़र्स हैदराबाद के सामने जीत के लिए 156 रनों का लक्ष्य था लेकिन दिल्ली के गेंदबाज़ों के सामने उसकी पूरी टीम 18.5 ओवर में ही महज़ 116 रन पर ढेर हो गई.

मैच में हैदराबाद के बल्लेबाज़ों का यह हाल था कि सलामी जोड़ी डेविड वार्नर और जॉनी बेयरस्टो ही कुछ जमकर खेल सके. इन दोनों ने पहले विकेट के लिए 72 रन भी जोडे़. वार्नर ने 51 और बेयरस्टो ने 41 रन बनाए.

इनके अलावा बाकी कोई भी बल्लेबाज़ दिल्ली के तेज़ गेंदबाज़ कैगिसो रबाडा, कीमो पॉल और क्रिस मोरिस की तिकड़ी का सामना नहीं कर सका. यहां तक कि हैदराबाद के बाकी बल्लेबाज़ दहाई के अंक तक भी नहीं पहुंचे.

कैगिसो रबाडा ने 22 रन देकर चार, क्रिस मोरिस ने 22 रन देकर तीन और कीमो पॉल ने 17 रन देकर तीन विकेट झटके.

इससे पहले दिल्ली कैपिटल्स ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी के लिए बुलाए जाने के बाद निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट खोकर 155 रन बनाए.

दिल्ली के कप्तान श्रेयस अय्यर ने 45 और कोलिन मुनरो ने 40 रन बनाए.

एक तरह से इस मैच में दिल्ली के तेज़ गेंदाबाज़ों के सामने हैदराबाद की बल्लेबाज़ी ताश के पत्तों की तरह ढह गई.

इस जीत के साथ ही दिल्ली कैपिटल्स आठ मैचों में पांच जीत और तीन हार और 10 अंको के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर आ गई है.

ऐसा लगता है कि दिल्ली ने अपना नाम बदलकर अपनी क़िस्मत भी बदल दी है. इससे पहले दिल्ली कैपिटल्स दिल्ली डेयरडेविल्स के नाम से खेलती थी.

दूसरी तरफ़ सनराईज़र्स हैरदराबाद के अब सात मैच में तीन जीत और चार हार के बाद छह अंक हैं और वह छठे स्थान पर पहुंच गई है.

इससे पहले खेले गए पहले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स ने अपनी जीत की लय बरक़रार रखते हुए ईडन गार्डंस में मेज़बान कोलकाता नाइट राइडर्स को पांच विकेट से मात दी.

चेन्नई के सामने जीत के लिए 162 रनों का लक्ष्य था जो उसने सुरेश रैना के नाबाद 58 और रविंद्र जडेजा के नाबाद 31 रन की मदद से दो गेंद पहले 19.4 ओवर में पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया.

इससे पहले टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए कोलकाता ने सलमी बल्लेबाज़ क्रिस लिन के 82 और नीतीश राणा के 21 रनों की मदद से निर्धारित 20 ओवर में आठ विकेट खोकर 161 रन बनाए.

इस मैच के हीरो वैसे तो सुरेश रैना रहे जो लम्बे समय बाद अपनी लय में लौटे लेकिन मैच में रोमांच रविंद्र जडेजा ने भी पैदा किया. उन्होंने पारी के 19वें ओवर में हैरी गर्नी की गेंदों पर लगातार तीन चौके लगाकर चेन्नई की नाव जीत के पार लगा दी.

इस ओवर में बने 16 रन कोलकाता की हार की मुख्य वजह भी साबित हुए.

आख़िरी ओवर में तो चेन्नई को जीत के लिए केवल आठ रनों की ज़रूरत थी जो पियूष चावला की गेंदों पर आसानी से बन गए.

इस मुक़ाबले में सुरेश रैना भी 42 गेंदों पर सात चौके और एक छक्के के सहारे बनाए गए नाबाद 58 रनों की बदौलत सुर्ख़ियों में छा गए. यह इस आईपीएल में सुरेश रैना का पहला अर्धशतक है.

इससे पहले वह दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़ 30 और राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ़ 36 रन बनाने में ज़रूर कामयाब रहे थे लेकिन इसके बाद लगातार चार मैच में उनका बल्ला कुछ ख़ास नही चमका.

वैसे सुरेश रैना आईपीएल के सबसे कामयाब बल्लेबाज़ो में से एक रहे हैं. वह आईपीएल में 5000 से अधिक रन बना चुके हैं.

सुरेश रैना दो साल पहले तब चर्चा में आए थे जब वह और युवराज सिंह श्रीलंका के ख़िलाफ़ एकदिवसीय सीरीज़ से पहले यो-यो टेस्ट की वजह से भारतीय टीम से बाहर कर दिए गए थे.

कभी भारतीय टीम के सर्वश्रेष्ठ फ़िल्डर माने जाने वाले सुरेश रैना ने भारत के लिए अपना पिछला एकदिवसीय मैच पिछले साल जुलाई में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेला था जिसमें वह केवल एक रन ही बना सके थे.

रविवार के चेन्नई की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले गेंदबाज़ इमरान ताहिर को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

उन्होंने चार ओवर में केवल 27 रन देकर चार विकेट हासिल किए.

उनका शिकार बने कोलकाता के लिए सर्वाधिक 82 रन बनाने वाले क्रिस लिन, नीतीश राणा, रॉबिन उथप्पा और अपने बल्ले से इस बार बेहद ख़तरनाक साबित हो रहे आंद्रे रसेल.

अगर यह माना जाए कि इमरान ताहिर ने चेन्नई की जीत की रहा आसान की तो ग़लत नहीं होगा. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी उन पर बेहद भरोसा है.

इस जीत की बदौलत पिछली चैंपियन चेन्नई तेज़ी से अंक तालिका में टॉप पर तो बनी हुई है साथ ही अब उसके खाते में आठ मैचों में सात जीत और एक हार के साथ 14 अंक हैं.

Monday, April 8, 2019

संविधान के दायरे में राम मंदिर निर्माण की संभावनाओं को तलाशा जाएगा

लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया.

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह घोषणा पत्र तीन चीज़ों पर आधारित है. उन्होंने कहा कि "राष्ट्रवाद हमारी प्रेरणा है, अन्त्योदय हमारा दर्शन है और सुशासन हमारा मंत्र है."

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अलग से जल शक्ति मंत्रालय बनाएगी, जो मछुआरों के सशक्तीकरण के लिए काम करेगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आज देश के कई प्रदेशों में पानी की समस्या के समाधान को गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है. इसलिए हम एक अलग 'जल शक्ति मंत्रालय' बनाएंगे."

अपने गिनाए वादों में उन्होंने हर घर तक नल से जल पहुंचाने की बात कही.

वहीं कांग्रेस ने भाजपा के घोषणा पत्र को "झांसा पत्र" करार दिया. कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घोषणा पत्र की जगह माफ़ीनामा पत्र जारी करना चाहिए था.

भाजपा ने अपने घोषणा पत्र को 'संकल्प पत्र' का नाम दिया है. अमित शाह की अध्यक्षता में जारी किए गए घोषणा पत्र में भाजपा ने वादा किया है कि राष्ट्रवाद उनकी सरकार की प्राथमिकता होगी.

राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.

वहीं उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर भी बात की और कहा कि संविधान के दायरे में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संभावनाओं की तलाश की जाएगी और सही प्रयास किए जाएंगे.

घोषणा पत्र में यह भी कहा गया है कि अगर अगली सरकार बनती है तो सबरीमला जैसे मामलों में "आस्था और विश्वास के विषयों को संवैधानिक संरक्षण" दिया जाएगा.

"आतंकवाद" और "उग्रवाद" के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस और "आतंकवाद" का मुकाबला करने के लिए सुरक्षाबलों को सशक्त किया जाएगा.

सुरक्षा बलों को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा.
पूर्वोत्तर राज्यों में अवैध घुसपैठ रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे.
धारा 370

जम्मू-कश्मीर में शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे.
भाजपा का मानना है कि धारा 35A जम्मू-कश्मीर के गैर-स्थायी निवासियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभावपूर्ण है. यह राज्य के विकास में बाधा है.

कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास किया जाएगा.
धारा 370 पर भाजपा सरकार का पुराना रुख़ बरकरार रहेगा.
राम मंदिर

संविधान के दायरे में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संभावनाओं को तलाश किया जाएगा और इसके लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे.

सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सबरीमला की आस्था, परंपरा और पूजा पद्धति का पूरा विषय रखा जाएगा. यह प्रयास होगा कि आस्था और विश्वास के विषयों को संवैधानिक संरक्षण मिले.
कृषि

देश के सभी किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की जाएगी.
छोटे और खेतिहर किसानों की सामाजिक सुरक्षा के लिए 60 साल की उम्र के बाद पेंशन दिया जाएगा.
कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए 25 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा.
आधारभूत संरचना/व्यापार

2022 तक रेल पटरियों का ब्रॉड गेज में परिवर्तन किया जाएगा और उनका विद्युतीकरण किया जाएगा.
भारत साल 2025 तक 5 लाख करोड़ डॉलर और साल 2032 तक 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगी.
आधारभूत संरचना को विकसित करने के लिए 100 लाख करोड़ का पूंजीगत निवेश किया जाएगा.
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए एक लाख करोड़ रुपए की क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की जाएगी.
राष्ट्रीय व्यापार आयोग की स्थापना की जाएगी.

175 गीगा वॉट नवीनकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करेंगे.
महिलाएं

सरकारी क्षेत्र में महिलाकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाएगी.
संविधान में प्रावधान करके महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा.
तीन तलाक़ को खत्म कर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाया जाएगा.
स्वास्थ्य

आयुष्मान भारत के तहत 1.50 लाख स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र खोले जाएंगे.
देशभर में 75 मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे.

प्रशिक्षित डॉक्टरों और जनसंख्या का अनुपात 1:1400 करने का प्रयास किया जाएगा.

Friday, April 5, 2019

43% ने कहा- पीएम पद पर मोदी पहली पसंद, लेकिन 41% मानते हैं उन्होंने राफेल में गड़बड़ी की

नई दिल्ली. देश में भले ही कुछ महीनों से अयोध्या, रफेल और गोरक्षा जैसे मुद्दे चर्चा में रहे हों, लेकिन वोटर इस समय विकास को सबसे अहम चुनावी मुद्दा मान रहा है। यह बात सीएसडीएस-लोकनीति-तिरंगा टीवी-द हिंंदू और दैनिक भास्कर के प्री-पोल सर्वे में सामने आई है। सर्वे में हिस्सा लेने वाले 43% लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी ही पहली पसंद हैं। हालांकि, 41% लोग मानते हैं मोदी ने राफेल में गड़बड़ी की पर मिनिमम इनकम गारंटी के चुनावी वादे के बावजूद 28% लोग ही चाहते हैं कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनें। सिर्फ 3% लोगों के लिए राफेल-मंदिर बड़े मुद्दे हैं। 33% विकास और 25% लोग महंगाई के मुद्दे पर वोट डालेंगे।

सर्वे कैसे हुआ
सर्वे 19 राज्यों में 24 से 31 मार्च के बीच किया गया। इसमें 101 लोकसभा क्षेत्रों की 101 विधानसभा सीटों के 10,010 लोगों ने भाग लिया। सर्वे में कुल 46% महिलाएं, 19% अनुसूचित जाति, 10% अनुसूचित जनजाति, 13% मुस्लिम, 2% ईसाई और 3% सिख मतदाता शामिल थे। यह सर्वे चार भागों में है। आज पढ़िए इसकी पहली कड़ी...

बालाकोट, सवर्ण आरक्षण, किसान सम्मान सबसे असरदार 
सर्वे में कई चौंकाने वाले फैक्टर सामने आए हैं। जैसे- मई 2018 में जहां सिर्फ 34% लोग चाहते थे कि मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनें। वहीं 24 से 31 मार्च के बीच किए गए इस प्री पोल सर्वे में 43 फीसदी लोगों ने मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री पद पर देखने की इच्छा जताई। यहां बालाकोट एयर स्ट्राइक, सवर्ण आरक्षण और किसान सम्मान जैसी योजनाओं का असर देखने को मिला।

किसान सम्मान योजना, एयर स्ट्राइक और सवर्ण आरक्षण ने मोदी की लोकप्रियता 9% तक बढ़ाई
इनकंबेंसी की मुखरता में फंसी मोदी सरकार के हालिया तीन फैसले उसे दोबारा सत्ता में दिलाने में मददगार हो सकते हैं। सीएसडीएस-लोकनीति के मार्च के आखिरी हफ्ते में किए गए सर्वे में यह निष्कर्ष सामने आया है। मोदी सरकार ने यह फैसले 7 जनवरी से 26 फरवरी के बीच लिए थे, इससे स्थिति कुछ बदल सकती है। हालांकि इसके बावजूद सत्ता में वापसी बेहद करीबी मामला होने जा रहा है।

मई 2018 : 34% लोग मोदी की वापसी चाहते थे, प्री पोल सर्वे : 43% चाहते हैं मोदी फिर पीएम बनें
7 जनवरी को मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया था। 1 फरवरी को गरीब किसानों के खाते में सीधे धन ट्रांसफर करने की किसान सम्मान निधि की घोषणा की थी। जबकि फरवरी के आखिरी हफ्ते में पुलवामा हमले के बदले के तौर पर पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक की थी। सर्वे के मुताबिक 43 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी की सत्ता में फिर से वापसी चाहते हैं। यह 2014 के चुनाव से सात फीसदी अधिक और मई 2018 के सर्वे की तुलना में नौ फीसदी अधिक है। मई 2018 में 34 फीसदी ने सरकार की वापसी चाही थी। शायद यह कहना गलत नहीं होगा कि यह इजाफा ऊपर बताए तीन फैसलों की वजह से है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2018 में तीन राज्यों में भाजपा की हार के बावजूद यह बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सर्वे में लोगों से पूछा गया कि वे किन मुद्दों पर वोट देंगे तो सिर्फ चार फीसदी ने एयरस्ट्राइक और तीन फीसदी ने ही सवर्ण आरक्षण को मुद्दा बताया। 33 फीसदी ने विकास, 25 फीसदी ने महंगाई और 20 फीसदी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर वोट डालने की बात कही है।

बालाकोट एयर स्ट्राइक से मोदी को फायदा

पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी कैंप तबाह करने का फैसला नरेन्द्र मोदी को इस चुनाव में फायदा पहुंचाने वाला हो सकता है। इस एयर स्ट्राइक के बारे में न जानने वाले वोटर्स की तुलना में जानने वाले वोटर्स में मोदी सरकार को एक और मौका देने का प्रतिशत ज्यादा है।